RANCHI
कांके इलाके में जमीन पर विवाद सुलझाने के मामले में कांके थानेदार प्रकाश रजक अब नए ’मास्टर’ बनकर उभरे हैं. कांके थानेदार को ना तो कानून से कोई लेना देना है ना ही जिले के वरिष्ठ पदाधिकारियों के आदेश की पड़ी है. साहब का जो मन करता है बस कर डालते हैं. यहां तक कि जमीन के साथ साथ घर भी खाली करवाकर अपने लोगों को कब्जा दिला डालते हैं.
कांके ब्लॉक चौक के पास बेशकीमती जमीन
कांके ब्लॉक चौक के पास खाता नम्बर 200 प्लॉट नम्बर 1467 जिसका कुल एरिया 41.5 डिसमिल है. जमीन की।बाजार कीमत करोड़ों में आंकी जा रही है और यह एक बेशकीमती जमीन है. जमीन की खरीद सियावर शरण सिन्हा के नाम से की गई है और उनके परिवार के विजय कुमार सिन्हा करीब 40 वर्षों से जमीन पर रहे हैं. जमीन पर अभी पारिवारिक विवाद चल रहा है और मामला न्यायालय में भी लंबित है. एसडीओ कोर्ट के आदेश के बाद जमीन के एक टुकड़े पर पुलिस के सहयोग से दूसरे पक्ष ने पहले कब्जा लिया और उसके बाद शुरू हुआ धमकी और गाली गलौज का सिलसिला.
परिवार ने डर कर छोड़ा घर
जिस जमीन पर कब्जा लिया गया ठीक उसके पीछे विजय कुमार सिन्हा अपने परिवार के साथ 10 डिसमिल जमीन पर कई सालों से घर बनाकर रह रहे थे. जमीन पर काम कर रहे लोगों के द्वारा बार बार उनसे घर खाली करवाने के लिए दवाब बनाया जा रहा था. ऐसे में उस विजय सिन्हा और उनके परिवार ने धमकी और मारपीट से बचने के लिए अपना घर किराए पर एक व्यक्ति को दे दिया और खुद परिवार के साथ दूसरी जगह चले गए. लेकिन कांके थानेदार प्रकाश रजक ने किरायेदार से पहले घर खाली करवाया और ताला लगा दिया. उसके बाद ताला की चाभी दूसरे पक्ष को सौंप दी. जबकि घर से संबंधित किसी भी तरह का निर्णय माननीय न्यायालय के द्वारा नहीं दिया गया है. घर पर कब्जा करवाने का यह मामला अब तूल पकड़ चुका है लेकिन रांची पुलिस की यह कार्यशैली पुलिस के उन ईमानदार अधिकारियों की छवि खराब करने वाली है.
डीजीपी ने दिया है जमीन दलालों से दूर रहने निर्देश
डीजीपी तदाशा मिश्रा ने राज्य पुलिस के आला अधिकारियों को साफ निर्देश दिया है कि जमीन दलालों से पुलिस दूरी बनाकर रखे. लेकिन थानेदारों की काली कमाई के पीछे छिपे जमीन दलालों का इससे कोई लेना देना नहीं. थाना मैनेज कर खुलेआम जमीन का कला धंधा चल रहा है जिसके कारण विवाद और ज्यादा बढ़ रहे हैं और पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं.

