झारखंड के रामगढ़ में हाथियों का कहर, तीन लोगों को कुचलकर मार डाला

Shashi Bhushan Kumar

रामगढ़, झारखंड के रामगढ़ जिले के गोला प्रखंड क्षेत्र में जंगली हाथियों के झुंड ने शुक्रवार की सुबह तीन लोगों को कुचलकर मार डाला। मृतकों में ईंट भट्ठा पर काम करने वाले दो मजदूर और एक बुजुर्ग ग्रामीण शामिल हैं।

घटना के बाद से पूरे इलाके में भय और वन विभाग के खिलाफ आक्रोश का माहौल है। पहली घटना बांदा गांव की है, जहां तड़के सुबह करीब चार बजे ईंट भट्ठा पर काम करने वाले दो मजदूर धीरज भुइयां और जुगल भुइयां शौच के लिए निकले थे। इसी दौरान हाथियों के झुंड ने उन्हें घेर लिया और पटक-पटक कर मार डाला। धीरज मूल रूप से पतरातू के तालाटांड़ का रहने वाला था, जबकि जुगल रामगढ़ के कुजू का निवासी था।

दूसरी घटना मुरपा गांव में हुई, जहां 80 वर्षीय रामदेव साव सुबह-सुबह महुआ चुनने के लिए घर से निकले थे। हाथियों ने उन पर हमला कर दिया और कुचलकर उनकी जान ले ली। बताया जा रहा है कि 12 हाथियों का यह झुंड बोकारो के जंगलों से होते हुए रामगढ़ जिले के रिहायशी इलाकों में दाखिल हुआ है। घटना की सूचना मिलने के बाद वन विभाग के अधिकारी और पुलिस मौके पर पहुंची। शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।

बांदा पंचायत के मुखिया कुलदीप तिवारी ने वन विभाग पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि हाथियों के आने की सूचना विभाग को पहले ही दे दी गई थी, लेकिन रिहायशी इलाकों से उन्हें खदेड़ने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सरकारी प्रावधान के अनुसार, प्रत्येक मृतक के परिजनों को चार-चार लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। तत्काल सहायता राशि देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

झारखंड में हाथियों और इंसानों के बीच संघर्ष लगातार खूनी होता जा रहा है। पिछले हफ्ते कोडरमा के मरकच्चो में हाथियों के हमले में तीन लोग मारे गए थे। आंकड़ों के अनुसार, राज्य में पिछले 50 दिनों के भीतर हाथियों के हमलों में 28 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

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शशी भूषण कुमार | पत्रकार (Journalist)- शशी भूषण कुमार 12+ वर्षों के अनुभव वाले पत्रकार हैं। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में कार्य करते हुए वर्तमान में Live 7 TV.com में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में संपादकीय नेतृत्व और न्यूज़ प्लानिंग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वे पिछले तीन वर्षों से झारखंड स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी में पत्रकारिता विभाग के गेस्ट फैकल्टी भी हैं। ग्रामीण पत्रकारिता पर शोध कार्य से जुड़े रहते हुए वे जमीनी और आदिवासी क्षेत्रों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
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