युद्ध से किसी का फायदा नहीं, अमेरिका-ईरान बातचीत की मेज पर आएं और तनाव कम करें : प्रतुल शाहदेव

Shashi Bhushan Kumar

भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने अंतरराष्ट्रीय हालात और देश की राजनीति को लेकर बयान दिया। उन्होंने कहा कि भारत की नीति हमेशा से यही रही है कि किसी भी संघर्ष में दोनों पक्षों से शांति और बातचीत की अपील की जाए।

प्रतुल शाहदेव ने कहा कि युद्ध से किसी का कोई फायदा नहीं होता। उन्होंने अमेरिका, इजराइल और ईरान से अपील करते हुए कहा कि सभी देश बातचीत की मेज पर आएं और तनाव कम करें। उन्होंने चेतावनी दी कि दुनिया में आर्थिक मंदी के संकेत दिखने लगे हैं और युद्ध के कारण निर्दोष लोगों की जान भी जा रही है।

वहीं, प्रतुल शाहदेव ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी संविधान की मूल भावना के खिलाफ काम कर रही हैं। पहले ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को निशाना बनाया और अब सुरक्षा बलों पर सवाल उठा रही हैं जबकि यही जवान कठिन परिस्थितियों में देश की सुरक्षा करते हैं।

उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग पूरी पारदर्शिता के साथ चुनाव करा रहा है लेकिन ममता बनर्जी को हार का डर सता रहा है। ममता बनर्जी अब तक गलत तरीकों से चुनाव जीतती रही हैं, इसलिए अब उन्हें चिंता हो रही है।

आगामी तमिलनाडु विधानसभा चुनाव को लेकर भी प्रतुल शाहदेव ने बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि इस बार डीएमके की हार तय है और राज्य में एनडीए की सरकार बनने जा रही है।

इसके साथ ही उन्होंने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि चाहे अखिलेश यादव कितनी भी सद्भावना यात्राएं निकाल लें, 2027 में उत्तर प्रदेश में फिर से भाजपा की सरकार प्रचंड बहुमत से बनेगी।

उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार के दौरान गुंडे खुलेआम हथियार लेकर घूमते थे, लेकिन अब ऐसी स्थिति खत्म हो चुकी है। यही कारण है कि विपक्षी नेता परेशान हैं।

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शशी भूषण कुमार | पत्रकार (Journalist)- शशी भूषण कुमार 12+ वर्षों के अनुभव वाले पत्रकार हैं। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में कार्य करते हुए वर्तमान में Live 7 TV.com में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में संपादकीय नेतृत्व और न्यूज़ प्लानिंग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वे पिछले तीन वर्षों से झारखंड स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी में पत्रकारिता विभाग के गेस्ट फैकल्टी भी हैं। ग्रामीण पत्रकारिता पर शोध कार्य से जुड़े रहते हुए वे जमीनी और आदिवासी क्षेत्रों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
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