झारखंडः रांची और धनबाद के बाद अब बोकारो कोर्ट कॉम्प्लेक्स को उड़ाने की धमकी, पुलिस अलर्ट, चल रही सघन चेकिंग

Shashi Bhushan Kumar

झारखंड में अदालतों और सरकारी परिसरों को बम से उड़ाने की धमकियों का सिलसिला रुक नहीं रहा है। राजधानी रांची में सिविल कोर्ट, समाहरणालय, पासपोर्ट ऑफिस को मिली धमकियों के बाद अब बोकारो सिविल कोर्ट परिसर को भी उड़ाने की धमकी ई-मेल पर आई है।

सोमवार को इसकी सूचना मिलते ही पूरे कोर्ट परिसर में अफरातफरी मच गई। एहतियातन कोर्ट परिसर को तत्काल खाली करा दिया गया और वहां मौजूद वकीलों, कर्मचारियों और मुवक्किलों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया। बोकारो के एसपी हरविंदर सिंह स्वयं मौके पर पहुंचे और सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी की।

पुलिस की कई टीमों को पूरे परिसर में तलाशी अभियान के लिए लगाया गया। बम की आशंका को देखते हुए बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वायड को भी बुलाया गया। कोर्ट भवन, पार्किंग क्षेत्र, कार्यालयों और आसपास के इलाकों की बारीकी से जांच की गई। परिसर में खड़ी गाड़ियों की भी सघन जांच की गई, जिसके लिए हैंड हेल्ड मेटल डिटेक्टर का इस्तेमाल किया गया।

सुरक्षा कारणों से कुछ समय तक आम लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई। इससे पहले 25 फरवरी को धनबाद के सिविल कोर्ट परिसर को भी इसी तरह धमकी भरा ई-मेल भेजा गया था, जिसमें परिसर में बम लगाए जाने का दावा किया गया था। तब पूरे परिसर को खाली कराकर पुलिस, डॉग स्क्वायड और बम निरोधक दस्ते ने अदालत कक्षों, वकीलों के चैंबर, हाजत और अन्य संवेदनशील स्थानों की सघन तलाशी ली गई थी।

हालांकि जांच के दौरान किसी संदिग्ध वस्तु के मिलने की पुष्टि नहीं हुई। उल्लेखनीय है कि इससे पहले रांची सिविल कोर्ट, समाहरणालय, डीसी ऑफिस और पासपोर्ट सेवा केंद्र को भी ई-मेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी मिल चुकी है। एक मामले में धमकी देने वाले ने ‘सल्फर नाइट्रेट’ आधारित विस्फोटक इस्तेमाल करने का दावा भी किया था। लगातार मिल रही धमकियों को देखते हुए पुलिस ने साइबर सेल को सक्रिय कर दिया है। ई-मेल के स्रोत, आईपी एड्रेस और सर्वर की तकनीकी जांच की जा रही है।

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शशी भूषण कुमार | पत्रकार (Journalist)- शशी भूषण कुमार 12+ वर्षों के अनुभव वाले पत्रकार हैं। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में कार्य करते हुए वर्तमान में Live 7 TV.com में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में संपादकीय नेतृत्व और न्यूज़ प्लानिंग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वे पिछले तीन वर्षों से झारखंड स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी में पत्रकारिता विभाग के गेस्ट फैकल्टी भी हैं। ग्रामीण पत्रकारिता पर शोध कार्य से जुड़े रहते हुए वे जमीनी और आदिवासी क्षेत्रों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
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