HAZARIBAGH
हर वर्ष 13 फरवरी को यूनेस्को की पहल पर विश्व रेडियो दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष की थीम “रेडियो और कृत्रिम बुद्धिमत्ता” रखी गई है, जो पारंपरिक प्रसारण माध्यम और आधुनिक तकनीक के मेल को दर्शाती है।

सूचना, शिक्षा और मनोरंजन का सशक्त माध्यम रहा रेडियो आज भी लोगों के जीवन का अभिन्न हिस्सा बना हुआ है। तकनीकी बदलावों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के विस्तार के बावजूद रेडियो ने समय के साथ खुद को ढालते हुए अपनी प्रासंगिकता कायम रखी है।

आकाशवाणी हजारीबाग के उद्घोषकों का कहना है कि प्रधानमंत्री Narendra Modi ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम के जरिए रेडियो को नई पहचान और ऊर्जा दी है। इसके अलावा ‘परीक्षा पे चर्चा’ जैसे कार्यक्रमों ने भी युवाओं के बीच रेडियो की पहुंच बढ़ाई है।
वरीय उद्घोषक राजीव कुमार ने कहा कि संचार के क्षेत्र में समय-समय पर कई बदलाव हुए हैं। पहले संदेश भेजने के लिए पारंपरिक साधनों का उपयोग होता था, फिर डाक और समाचार पत्रों का दौर आया। रेडियो ने इन सभी चरणों के बीच एक मजबूत और विश्वसनीय माध्यम के रूप में अपनी जगह बनाई। उनका मानना है कि डिजिटल युग में भी रेडियो की उपयोगिता स्पष्ट रूप से बनी हुई है।
उद्घोषक प्रकाश राणा ने कहा कि ‘मन की बात’ कार्यक्रम ने रेडियो को फिर से व्यापक स्तर पर लोकप्रिय बनाया है। उनके अनुसार, समसामयिक विषयों पर रेडियो के माध्यम से संवाद स्थापित होने से श्रोताओं के साथ सीधा जुड़ाव बना है।
आकाशवाणी हजारीबाग की उद्घोषक अलका कुमार ने बताया कि पहले लोग एक स्थान पर रेडियो सुनने के लिए इकट्ठा होते थे, जबकि अब मोबाइल फोन के माध्यम से रेडियो हर व्यक्ति की पहुंच में है। उनका कहना है कि विशेष कार्यक्रमों और खेल प्रतियोगिताओं के लाइव प्रसारण से भी श्रोताओं की संख्या में वृद्धि हुई है।
उद्घोषकों का मानना है कि रेडियो ने बदलते समय में भी अपनी विश्वसनीयता और आत्मीयता को बनाए रखा है और आज भी यह लोगों के दिलों में एक खास स्थान रखता है।

