झारखंड : धनबाद में गैस कटर का सिलेंडर फटने से बड़ा हादसा, दो की मौत, दो गंभीर रूप से घायल

Shashi Bhushan Kumar

धनबाद, झारखंड के धनबाद जिले के मुनीडीह क्षेत्र में शनिवार की आधी रात गैस कटर का सिलेंडर फटने से हुए एक भीषण हादसे में दो लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। प्राप्त जानकारी के अनुसार, शनिवार रात करीब 12 बजे जब क्षेत्र में कामकाज चल रहा था, तभी अचानक गैस कटर के सिलेंडर में ब्लास्ट हो गया।

धमाका इतना जोरदार था कि इसकी गूंज दूर तक सुनी गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, घटना के समय मौके पर करीब 8 से 10 लोग मौजूद थे। सिलेंडर फटते ही उसमें भरी गैस तेजी से पूरे वातावरण में फैल गई, जिससे वहां मौजूद लोगों को सांस लेने में भारी दिक्कत होने लगी और दम घुटने जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई। गैस के रिसाव और धमाके की चपेट में आने से चार लोग गंभीर रूप से प्रभावित हुए।

स्थानीय लोगों और सहकर्मियों की मदद से आनन-फानन में सभी घायलों को शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल पहुंचाया गया। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों की टीम ने तत्काल प्राथमिक उपचार शुरू किया, लेकिन दो लोगों को बचाया नहीं जा सका। डॉक्टरों ने इलाज के दौरान संजय यादव और मो. अजहरुद्दीन को मृत घोषित कर दिया। वहीं, हादसे में घायल मो. अब्राहिम और मो. इमामुद्दीन का अस्पताल में उपचार जारी है।

डॉक्टरों के अनुसार, दोनों घायलों की स्थिति फिलहाल गंभीर बनी हुई है और मेडिकल टीम उनकी निरंतर निगरानी कर रही है। हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का मुआयना किया। प्रारंभिक जांच में गैस कटर के संचालन के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी की बात सामने आ रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच की जा रही है कि आखिर आधी रात को किस परिस्थिति में गैस कटर का इस्तेमाल किया जा रहा था और सुरक्षा के क्या इंतजाम थे।

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शशी भूषण कुमार | पत्रकार (Journalist)- शशी भूषण कुमार 12+ वर्षों के अनुभव वाले पत्रकार हैं। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में कार्य करते हुए वर्तमान में Live 7 TV.com में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में संपादकीय नेतृत्व और न्यूज़ प्लानिंग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वे पिछले तीन वर्षों से झारखंड स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी में पत्रकारिता विभाग के गेस्ट फैकल्टी भी हैं। ग्रामीण पत्रकारिता पर शोध कार्य से जुड़े रहते हुए वे जमीनी और आदिवासी क्षेत्रों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
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