झाड़ग्राम
देश की सार्वजनिक वित्तीय व्यवस्था में अधिक पारदर्शिता और संवैधानिक जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से Comptroller and Auditor General of India (CAG) संस्था की कार्यक्षमता को और सुदृढ़ करने का अनुरोध करते हुए जंगलमहल स्वराज मोर्चा की ओर से ई-मेल के माध्यम से भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी के समक्ष एक औपचारिक स्मारक-पत्र प्रस्तुत किया गया है।
JSM ने अपने वक्तव्य में कहा है कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 148 के अंतर्गत स्थापित CAG देश की वित्तीय निगरानी प्रणाली का एक अत्यंत महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्थान है। संविधान के अनुच्छेद 148 से 151 के अनुसार CAG केंद्र और राज्य सरकारों के खातों का लेखा-परीक्षण करता है और यह सुनिश्चित करता है कि जनता का धन विधायिका की स्वीकृति और संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप सही ढंग से व्यय हो रहा है।
स्मारक-पत्र में कहा गया है कि एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में पारदर्शी और वित्तीय रूप से उत्तरदायी प्रशासन जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है। अतीत में CAG की लेखा-परीक्षण रिपोर्टों ने कई वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक कमजोरियों को उजागर किया है। किंतु कुछ प्रक्रियागत सीमाओं के कारण कई बार उन अवलोकनों पर त्वरित और प्रभावी कार्रवाई संभव नहीं हो पाती।
इस संदर्भ में कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों को रेखांकित किया गया है— 1. संसद और राज्य विधानसभाओं में CAG की रिपोर्ट प्रस्तुत होने में कई बार विलंब होता है। 2. रिपोर्टों की समीक्षा और Action Taken Report (ATR) प्रस्तुत करने की कोई निश्चित समयसीमा निर्धारित नहीं है। 3. Public Accounts Committee सहित विधायिका की विभिन्न समितियों में अनेक लेखा-परीक्षण टिप्पणियाँ लंबे समय तक लंबित रहती हैं। 4. महत्वपूर्ण लेखा-परीक्षण जानकारी आम लोगों तक सरल भाषा में पहुँचाने की व्यवस्था भी सीमित है।
इन समस्याओं के समाधान के लिए JSM ने कुछ गठनमूलक प्रस्ताव भी दिए हैं, जिनमें शामिल हैं— 1. संसद और विधानसभाओं में CAG की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए स्पष्ट समयसीमा निर्धारित करना। 2. लेखा-परीक्षण टिप्पणियों की शीघ्र समीक्षा तथा संबंधित विभागों द्वारा प्रस्तुत Action Taken Reports को सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराना। 3. Public Accounts Committee के कार्य को अधिक प्रभावी बनाने के लिए स्पष्ट जवाबदेही और दक्ष प्रक्रियाओं का विकास करना। 4. आम जनता की जागरूकता के लिए महत्वपूर्ण लेखा-परीक्षण निष्कर्षों का सरल भाषा में सार प्रकाशित करना। 5. गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में संवैधानिक ढांचे के भीतर उपयुक्त जांच या निगरानी तंत्र की संभावनाओं का परीक्षण करना।
जंगलमहल स्वराज मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष अशोक महतो ने कहा कि इन प्रस्तावों का उद्देश्य संविधान की संरचना में परिवर्तन करना नहीं है, बल्कि वित्तीय अनुशासन, विधायिका की निगरानी और लोकतांत्रिक जवाबदेही को और मजबूत करना है। उन्होंने और भी कहा, “एक सशक्त और प्रभावी लेखा-परीक्षण प्रणाली भारत के लोकतंत्र को और सुदृढ़ करेगी तथा जन प्रशासन के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ाएगी।”
जंगलमहल स्वराज मोर्चा ने आशा व्यक्त की है कि इस विषय को संवैधानिक ढांचे के भीतर उचित महत्व के साथ विचार किया जाएगा।

