मोतिहारी शराब कांड छिटपुट घटना, तेजस्वी के माता-पिता ने बिहार को रसातल में पहुंचा दिया था: श्रवण कुमार

Shashi Bhushan Kumar

पटना, बिहार सरकार में मंत्री श्रवण कुमार ने मोतिहारी में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों पर तेजस्वी यादव के बयान को लेकर प्रतिक्रिया दी। मंत्री ने शराब कांड को छिटपुट घटना बताते हुए कार्रवाई करने की बात कही।

मोतिहारी शराब कांड को लेकर आरजेडी और विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे सवाल पर मंत्री श्रवण कुमार ने कहा, “ छिटपुट घटनाएं हो रही हैं और हम इन्हें नजरअंदाज नहीं कर सकते। हम ऐसी स्थिति में नहीं हैं, जहां इन घटनाओं को अनदेखा किया जा सके। इन घटनाओं को रोकने के लिए हरसंभव प्रयास किया जा रहा है और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।”

बिहार में शराबबंदी के बाद भी शराब पीने से मौत होने के सवाल पर मंत्री ने कहा, “इसकी जांच हो रही है, जो भी दोषी होंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। बिहार में किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने या उसका उल्लंघन करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।”

तेजस्वी यादव द्वारा बिहार को देश का सबसे गरीब राज्य बताने वाले बयान पर श्रवण कुमार ने कहा, “बिहार की जनता ने उन्हें नकार दिया है, इसलिए वे विरोधी बयान दे रहे हैं। तेजस्वी के माता-पिता ने 15 साल में बिहार को रसातल पहुंचा दिया था और अपहरण उद्योग को बढ़ावा देने के साथ घोटाले का प्रदेश बना दिया था जबकि नीतीश कुमार ने 20 सालों में बिहारी कहलाना स्वाभिमान का विषय बनाया। अब तेजस्वी को अच्छा नहीं लग रहा है, तो वह अपने माता-पिता के समय का प्रचार कर रहे हैं। तेजस्वी जितना बिहार का अपमान करेंगे, उतना ही जनता उनको जवाब देगी।”

गौरतलब है कि मोतिहारी में जहरीली शराब पीने से तीन दिन में 6 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि कई लोग अस्पताल में भर्ती हैं। राजद नेता तेजस्वी यादव ने कहा था कि यह घटना एक बार फिर एनडीए सरकार के शराबबंदी कानून की विफलता और उसकी गंभीर खामियों को उजागर करती है। आंकड़ों के अनुसार शराबबंदी लागू होने के बाद से अब तक बिहार में जहरीली शराब से 1300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।

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शशी भूषण कुमार | पत्रकार (Journalist)- शशी भूषण कुमार 12+ वर्षों के अनुभव वाले पत्रकार हैं। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में कार्य करते हुए वर्तमान में Live 7 TV.com में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में संपादकीय नेतृत्व और न्यूज़ प्लानिंग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वे पिछले तीन वर्षों से झारखंड स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी में पत्रकारिता विभाग के गेस्ट फैकल्टी भी हैं। ग्रामीण पत्रकारिता पर शोध कार्य से जुड़े रहते हुए वे जमीनी और आदिवासी क्षेत्रों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
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