नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में साइबर अपराध के एक बड़े मामले का खुलासा हुआ है। क्राइम ब्रांच की साइबर सेल ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह के दो प्रमुख आरोपियों—अनिश सिंह और मणि सिंह—को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह डर और मनोवैज्ञानिक दबाव बनाकर लोगों से करोड़ों रुपये ऐंठ रहा था। जांच में पता चला है कि आरोपियों से जुड़े बैंक खातों में करीब 100 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन हुए हैं और इनके खिलाफ एनसीआरपी पोर्टल पर 190 शिकायतें दर्ज हैं।
मामले में पीड़िता को कथित तौर पर मुंबई साइबर क्राइम के वरिष्ठ अधिकारी बताकर कॉल किया गया और आधार से जुड़े झूठे आपराधिक मामले में फंसाने की धमकी दी गई। इसके बाद एक महिला ने वीडियो कॉल पर नकली एफआईआर और फर्जी गिरफ्तारी वारंट दिखाकर भय का माहौल बनाया। पीड़िता और उसके परिवार को गिरफ्तारी की धमकी दी गई और उसे लगातार “डिजिटल अरेस्ट” में रखकर किसी से बात न करने के लिए मजबूर किया गया।
इस दौरान पीड़िता से अलग-अलग किस्तों में कुल 40 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए गए। हर भुगतान के बाद उसे चैट और लेनदेन के सबूत मिटाने को कहा गया। आखिरकार पीड़िता ने शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद क्राइम ब्रांच ने जांच शुरू की।
जांच का नेतृत्व इंस्पेक्टर संदीप सिंह ने किया, जिसमें तकनीकी टीम ने डिजिटल सबूतों का विश्लेषण कर पूरे नेटवर्क का पता लगाया। पड़ताल में सामने आया कि पश्चिम दिल्ली स्थित मेसर्स वृंदाकार्ट स्काईलाइन शॉपर्स प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी के खाते के जरिए फंड रूटिंग की जा रही थी। इस कंपनी के संयुक्त निदेशक अनिश सिंह और मणि सिंह निकले।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने ठगी की रकम घुमाने के लिए विभिन्न बैंकों में आठ खाते खोल रखे थे और पहचान छिपाने के लिए फर्जी सिम कार्ड व जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल करते थे। दोनों आरोपी पहले भी इसी तरह के मामले में फरीदाबाद पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
यह कार्रवाई इंस्पेक्टर संदीप सिंह के नेतृत्व और एसीपी अनिल शर्मा के निर्देशन में की गई। पुलिस ने कहा है कि मामले में आगे की जांच जारी है और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा रही है।

