नई दिल्ली:मुफ्त राशन वितरण प्रणाली में सरकार एक नई तकनीकी पहल करने जा रही है। आगामी महीने से चंडीगढ़, पुडुचेरी और गुजरात के कुछ जिलों में डिजिटल फूड कूपन के जरिए मुफ्त अनाज देने का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा। इस नई व्यवस्था के तहत लाभार्थियों को अब बायोमेट्रिक सत्यापन या अंगूठा लगाने की आवश्यकता नहीं होगी।
पायलट योजना के अंतर्गत चुनिंदा लाभार्थियों को सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) आधारित डिजिटल फूड कूपन उपलब्ध कराए जाएंगे। ये कूपन हर महीने सीधे लाभार्थियों के मोबाइल फोन में मौजूद आरबीआई-सक्षम डिजिटल वॉलेट में ट्रांसफर किए जाएंगे। राशन लेने के लिए लाभार्थी को दुकान पर केवल दुकानदार का क्यूआर कोड स्कैन करना होगा।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य देश की खाद्य सुरक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाना और वितरण में होने वाली गड़बड़ियों को रोकना है। साथ ही, बायोमेट्रिक असफलता के कारण राशन न मिलने जैसी समस्याओं से भी लोगों को राहत मिलेगी।
यह योजना डिजिटल फूड करेंसी के लिए प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट के रूप में लागू की जा रही है। शुरुआत में इसे सीमित दायरे में रखा जाएगा, ताकि इसकी तकनीकी क्षमता और व्यावहारिक उपयोग का मूल्यांकन किया जा सके। कूपन के दुरुपयोग या जमा होने से बचने के लिए इनके इस्तेमाल की एक निश्चित समय सीमा भी तय की जाएगी।
अधिकारियों ने बताया कि इस महीने की शुरुआत में अहमदाबाद में 25 लाभार्थियों के साथ इसका सॉफ्ट ट्रायल किया गया था, जिसमें अब तक लगभग 2,000 सफल लेनदेन दर्ज किए जा चुके हैं। आगामी पायलट चरण में गुजरात के आनंद, साबरमती और दाहोद जिलों को शामिल किया जाएगा।
चंडीगढ़ और पुडुचेरी में पहले से ही अनाज के लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) प्रणाली लागू है, जहां लाभार्थियों को नकद सहायता दी जाती है। डिजिटल फूड कूपन व्यवस्था से यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि सब्सिडी की राशि केवल खाद्यान्न खरीदने में ही खर्च हो।
सरकार उन लाभार्थियों को इस प्रणाली से जोड़ने के विकल्पों पर भी काम कर रही है, जिनके पास स्मार्टफोन नहीं हैं और जो केवल साधारण या फीचर फोन का उपयोग करते हैं। इसके लिए अलग तकनीकी समाधान तैयार किए जाने पर विचार किया जा रहा है।

