नयी दिल्ली 13 सितंबर (लाइव 7) सरकार ने बासमती चावल से न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) हटा लिया है। बासमती चावल के निर्यात पर न्यूनतम मूल्य की शर्त 20 जुलाई, 2023 से लागू थी। जिसे तत्काल प्रभाव से हटा लिया गया है।
वाणिज्य मंत्रालय में अवर सचिव, ईपी (कृषि-2) प्रभार सीमा जुनेजा द्वारा कृषि उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के अध्यक्ष को शुक्रवार को लिख पत्र में वाणिज्य विभाग के इस निर्णय की जानकारी दी गयी है।
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया पर कहा, “यह किसान कल्याण की दिशा में बड़ा कदम है। बासमती चावल से एमईपी को हटाने का निर्णय अभिनंदनीय है। इससे निर्यात भी बढ़ेगा और किसानों की आमदनी में भी वृद्धि होगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार द्वारा लिया गया यह फैसला उनकी किसानों के प्रति संवदनशीलता को दर्शाता है।”
एपीडा और चावल निर्यातकों ने इस फैसले का स्वागत किया है। भारतीय चावल निर्यातक महासंघ (आईआरईएफ) के अध्यक्ष डॉ. गर्ग ने यूनीलाइव 7 से कहा, “सरकार ने बासमती चावल पर एमईपी हटाने की हमारी मांग को स्वीकार कर निर्यातकों और किसानों के हित में एक बड़ा फैसला किया है। हम तीन महीने से इसकी सिफारिश कर रहे थे। इससे बासमती चावल की मांग बढ़ेगी और किसानाें को इसका फायदा मिलेगा और वे उत्पादन बढ़ाने का प्रेरित होंगे।”
डॉ. गर्ग ने कहा कि एमईपी हटाने से इस बार बासमती चावल के निर्यात में 25 से 30 प्रतिशत वृद्धि की उम्मीद की जा सकती है। पिछले वर्ष भारत से बासमती चावल का निर्यात 55 लाख टन के दायरे में था जो इस बार 65 लाख टन तक पहुंच सकता है।
उन्होंने सरकार से अपील की है कि वह सरकार गोदामों से सफेद चावल खुले बाजार के लिए जारी करे। ताकी इसका भी निर्यात बढ़ाया जा सके। उन्होंने कहा, “ इस साल बारिश अच्छी होने से धान की फसल अच्छी रहने का अनुमान है। चावल का उत्पादन 14.2 करोड़ टन पहुंचने का अनुमान है। हम चाहते हैं कि सफेद चावल के स्टॉक को खुले बाजार में छोड़ा जाये, ताकि भारत को विश्व बाजार का लाभ मिल सके।”
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बासमती निर्यात पर न्यूनतम निर्यात मूल्य की शर्त हटी

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