जमशेदपुर
जमशेदपुर के प्रसिद्ध उद्यमी देवांग गांधी के पुत्र और युवा कारोबारी कैरव गांधी को 14 दिन बाद सुरक्षित बरामद कर लिया गया है। मंगलवार तड़के करीब 4:30 बजे वे अपने जमशेदपुर स्थित आवास पहुंचे, जिसके बाद परिजनों और शहरवासियों ने राहत की सांस ली।
पुलिस के अनुसार, कैरव गांधी को झारखंड के हजारीबाग और बिहार के गया जिले की सीमा के बीच से मुक्त कराया गया। जमशेदपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पीयूष पांडेय ने सकुशल बरामदगी की पुष्टि करते हुए कहा कि पीड़ित की सुरक्षा पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता थी, जिसमें सफलता मिली है। उन्होंने बताया कि अपहरण में शामिल अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए छापेमारी और तकनीकी जांच जारी है।
कैरव गांधी का अपहरण 13 जनवरी को उस समय हुआ था, जब वे अपनी क्रेटा कार से घर से निकले थे। उन्होंने परिजनों को बताया था कि वे पहले बिष्टुपुर स्थित एसबीआई बैंक जाएंगे, फिर आदित्यपुर स्थित अपनी कंपनी और उसके बाद दोपहर में घर लौटेंगे। दोपहर 1:45 बजे तक घर न पहुंचने और मोबाइल बंद मिलने पर परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की थी।
कुछ ही देर बाद परिजनों को एक विदेशी नंबर से कॉल आया, जिसमें अपहरण की जानकारी देते हुए पांच करोड़ रुपये की फिरौती मांगी गई थी। बाद में फिरौती की मांग बढ़कर दस करोड़ रुपये तक पहुंचने की बातें भी सामने आई थीं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने सात विशेष जांच टीमें (एसआईटी) गठित की थीं, जो झारखंड के अलावा बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में लगातार कार्रवाई कर रही थीं। हाल ही में झारखंड की पुलिस महानिदेशक भी जमशेदपुर पहुंचकर जांच की प्रगति की समीक्षा कर चुकी थीं।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि कैरव गांधी की रिहाई पूरी तरह पुलिस कार्रवाई का परिणाम है या अन्य प्रयासों से यह संभव हुआ। पुलिस ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा।

