पटना
बिहार में महिलाओं की सशक्त भागीदारी की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए अब पिंक बसों का संचालन पूरी तरह महिलाओं द्वारा किया जाएगा। इस पहल के तहत महिला ड्राइवरों को भी तैयार किया गया है और गणतंत्र दिवस पर आयोजित झांकी में इस योजना को पहला पुरस्कार मिला है।
पहले चरण में छह महिला ड्राइवरों को प्रशिक्षण देकर तैयार किया गया है। ये सभी समाज के महादलित समुदाय से आती हैं। पिंक बस सेवा की शुरुआत पटना के परिवहन कार्यालय से की गई है। परिवहन विभाग ने मई 2025 में इस सेवा की नींव रखी थी, जिसका उद्देश्य महिलाओं के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराना है।
बिहार परिवहन विभाग के अनुसार, पिंक बसों में ड्राइवर और कंडक्टर दोनों की भूमिका अब महिलाएं निभाएंगी। इसके तहत महिलाओं को भारी वाहन (एचएमवी) लाइसेंस भी प्रदान किए गए हैं, जिससे सार्वजनिक परिवहन में उनकी पूर्ण भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
परिवहन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह पहल न सिर्फ महिलाओं की सुरक्षा को मजबूत करेगी, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। गणतंत्र दिवस पर राज्य परिवहन निगम की झांकी को प्रथम पुरस्कार मिलना इस प्रयास की राष्ट्रीय स्तर पर सराहना का संकेत है।
पिंक बस की ड्राइवर बनीं अनीता कुमारी ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वे बस चलाएंगी, लेकिन आज यह सपना साकार हो गया है। वहीं भोजपुर जिले की आरती कुमारी ने बताया कि उन्होंने एलएमवी और एचएमवी दोनों के लिए विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया है।
सरस्वती कुमारी ने कहा कि वे गर्व महसूस करती हैं कि अब महिलाएं भी वह काम कर रही हैं, जो परंपरागत रूप से पुरुषों से जुड़ा माना जाता रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आरक्षण और सरकारी सहयोग से आने वाले समय में और भी लड़कियां आगे बढ़ेंगी।
यह पहल बिहार में महिला सशक्तिकरण, सामाजिक समावेशन और सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आई है।

