यूके-भारत सांस्कृतिक सहयोग से झारखण्ड की आदिवासी विरासत को वैश्विक पहचान: हेमंत सोरेन

Shashi Bhushan Kumar

“झारखंड @25” वैश्विक आउटरीच कार्यक्रम के तहत यूनाइटेड किंगडम प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड सरकार के एक आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल ने Historic England के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। Historic England, यूके की ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन की जिम्मेदार सार्वजनिक संस्था है।

बैठक का उद्देश्य विरासत संरक्षण, अनुसंधान और सांस्कृतिक पर्यटन के क्षेत्र में आपसी सहयोग की संभावनाओं पर विचार-विमर्श करना रहा। इस दौरान मेगालिथ, मोनोलिथ, प्रागैतिहासिक परिदृश्य और जीवाश्म उद्यानों के संरक्षण से जुड़ी वैश्विक सर्वोत्तम पद्धतियों, वैज्ञानिक प्रलेखन, संरक्षण योजनाओं, व्याख्या प्रणाली और समुदाय आधारित विरासत प्रबंधन पर विस्तृत चर्चा की गई।

इस अवसर पर Historic England की ओर से मुख्यमंत्री को एवेबरी और स्टोनहेंज जैसे विश्वविख्यात प्रागैतिहासिक स्थलों के भ्रमण हेतु विशेष आमंत्रण भी दिया गया।

यूके-भारत व्यापक सांस्कृतिक सहयोग कार्यक्रम से सशक्त होगी झारखण्ड की विरासत

यह बैठक यूके-भारत व्यापक सांस्कृतिक सहयोग कार्यक्रम (Comprehensive Programme of Cultural Cooperation – POCC) 2025 के संदर्भ में आयोजित हुई, जो विरासत संरक्षण, संग्रहालय, पुरातत्व, क्षमता निर्माण, अनुसंधान, प्रलेखन और जन सहभागिता के लिए एक संरचित द्विपक्षीय ढांचा प्रदान करता है।
यह कार्यक्रम भारतीय और ब्रिटिश विरासत संस्थानों के बीच संस्थागत साझेदारी, विशेषज्ञों के आदान-प्रदान और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देता है।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है, जो इस द्विपक्षीय ढांचे का उपयोग कर अपनी प्राचीन एवं आदिवासी विरासत के संरक्षण और वैश्विक पहचान को सुदृढ़ कर रहा है।
उन्होंने बताया कि झारखंड उन चुनिंदा क्षेत्रों में है, जहां मेगालिथिक परंपराएं आज भी जीवंत सांस्कृतिक अभ्यास के रूप में समुदायों के दैनिक जीवन से जुड़ी हुई हैं।

झारखण्ड के प्रमुख विरासत स्थलों की प्रस्तुति

बैठक में झारखंड के प्रमुख विरासत स्थलों — हजारीबाग का पकरी बरवाडीह मेगालिथिक परिसर, साहिबगंज का मंदर जीवाश्म उद्यान तथा राज्य के विभिन्न जिलों में फैले मोनोलिथ, शैलचित्र और पाषाण स्मारकों को विशेष रूप से प्रस्तुत किया गया।
झारखंड सरकार की दृष्टि विरासत संरक्षण को अनुसंधान, शैक्षणिक साझेदारी, स्थानीय आजीविका, समुदाय आधारित पर्यटन और आदिवासी ज्ञान प्रणालियों से जोड़ने की है।

इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल की ओर से “Sentinels of Time” शीर्षक से प्रकाशित एक कॉफी टेबल बुक भी प्रस्तुत की गई, जिसमें झारखंड के मेगालिथिक और जीवाश्म परिदृश्यों को शोध आधारित लेखों और दृश्य दस्तावेजों के माध्यम से दर्शाया गया है।

कार्यक्रम में मंत्री सुदिव्य कुमार, झारखण्ड विधानसभा की महिला एवं बाल विकास समिति की अध्यक्ष कल्पना मुर्मू सोरेन, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, गृह सचिव वंदना डाडेल, इंग्लैंड की सह-मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्लॉडिया केन्याटा तथा भारतीय उच्चायोग, ब्रिटिश उप-उच्चायोग (कोलकाता), English Heritage Trust, National Trust और Natural England के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

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