रामगढ़ में शुरू हुआ राज्य का पहला ट्रांस कैफे, सम्मान और आत्मनिर्भरता की नई पहल

Shashi Bhushan Kumar

झारखंड के रामगढ़ जिले में ट्रांसजेंडर समुदाय को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। जिला प्रशासन की पहल पर कलेक्ट्रेट पार्क परिसर में राज्य का पहला “ट्रांस कैफे” आरंभ किया गया। इसका उद्घाटन मंगलवार को उपायुक्त फैज अक अहमद मुमताज ने किया।

इस कैफे के संचालन की जिम्मेदारी ‘किन्नर उत्थान समिति’ नामक स्वयं सहायता समूह को सौंपी गई है। यहां फिलहाल चाय, कॉफी, नाश्ता और हल्के खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराए जा रहे हैं। आगे चलकर ग्राहकों की आवश्यकता के अनुरूप मेनू में विस्तार करने की योजना है।उद्घाटन के बाद उपायुक्त ने इसे सामाजिक समावेशन की दिशा में सार्थक प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि यह पहल आत्मसम्मान, आर्थिक मजबूती और सामाजिक स्वीकृति को बढ़ावा देगी। साथ ही नागरिकों से अपील की कि वे कैफे में पहुंचकर समुदाय का मनोबल बढ़ाएं।

प्रशासन के अनुसार जिले में लगभग 50 ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की पहचान की गई है और उनके कल्याण के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। ट्रांस कैफे उसी व्यापक योजना का हिस्सा है। वर्तमान में कैफे संचालन समिति में समुदाय के 10 सदस्य जुड़े हैं।

इसके अतिरिक्त, ट्रांसजेंडर समुदाय के इच्छुक सदस्यों के लिए ब्यूटीशियन प्रशिक्षण कार्यक्रम भी प्रारंभ किया गया है, जिससे वे स्वरोजगार के अवसर प्राप्त कर सकें।

‘किन्नर उत्थान समिति’ की अध्यक्ष हिमांशी प्रधान ने कहा कि समाज में मौजूद पूर्वाग्रहों के बावजूद अवसर मिलने पर ट्रांसजेंडर समुदाय भी पूरी जिम्मेदारी और क्षमता के साथ कार्य कर सकता है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह कैफे आत्मविश्वास और क्षमता का प्रतीक बनेगा।

स्वास्थ्य सुविधाओं को सुलभ बनाने के लिए प्रत्येक शनिवार सदर अस्पताल में ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए विशेष ओपीडी की व्यवस्था की गई है। साथ ही, रामगढ़ शहर में तीन सार्वजनिक स्थानों पर समुदाय के लिए विशेष शौचालयों का निर्माण भी कराया गया है।

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शशी भूषण कुमार | पत्रकार (Journalist)- शशी भूषण कुमार 12+ वर्षों के अनुभव वाले पत्रकार हैं। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में कार्य करते हुए वर्तमान में Live 7 TV.com में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में संपादकीय नेतृत्व और न्यूज़ प्लानिंग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वे पिछले तीन वर्षों से झारखंड स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी में पत्रकारिता विभाग के गेस्ट फैकल्टी भी हैं। ग्रामीण पत्रकारिता पर शोध कार्य से जुड़े रहते हुए वे जमीनी और आदिवासी क्षेत्रों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
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