केंद्रीय बजट पर विपक्ष का तीखा हमला, बताया निराशाजनक और जनविरोधी

Shashi Bhushan Kumar

लखनऊ: केंद्रीय बजट 2026 को लेकर विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर कड़ा प्रहार किया है। समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस ने बजट को आम जनता से दूर, पूंजीपतियों के पक्ष में और गरीब-मध्यम वर्ग की उम्मीदों के विपरीत बताया है। विपक्षी नेताओं ने महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की स्थिति और सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर बजट को पूरी तरह विफल करार दिया।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बजट पेश होते ही सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि बजट के बाद शेयर बाजार में गिरावट सरकार की नीतियों का परिणाम है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा का हर बजट केवल पांच प्रतिशत लोगों के हित में होता है, जबकि आम जनता की समस्याओं की अनदेखी की जाती है। उन्होंने इसे “कमीशनखोरी और अपने लोगों को फायदा पहुंचाने वाला बजट” बताया।

अखिलेश यादव ने कहा कि बजट में महंगाई से जूझ रही जनता को टैक्स में कोई राहत नहीं दी गई, जो उनके अनुसार ‘टैक्स-शोषण’ है। उन्होंने कहा कि अमीरों को रियायतें दी गईं, जबकि बेरोजगार युवाओं और मध्यम वर्ग को निराशा हाथ लगी है। किसानों, मजदूरों और छोटे व्यापारियों के लिए ठोस राहत का अभाव दिखता है। उन्होंने बजट को “निराशाजनक और निंदनीय” बताया।

बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने भी बजट पर सवाल उठाते हुए कहा कि योजनाओं और घोषणाओं के नाम भले बड़े हों, लेकिन जमीनी स्तर पर इनके प्रभाव को लेकर संदेह बना हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार को केवल घोषणाएं करने के बजाय ईमानदारी से उन्हें लागू करना चाहिए।

मायावती ने यह भी कहा कि बजट सरकार की नीति और नीयत का आईना होता है, जिससे पता चलता है कि सरकार वास्तव में गरीबों और बहुजन समाज के हित में काम कर रही है या पूंजीपतियों के पक्ष में। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या यह बजट देश को आत्मनिर्भर बनाने और संविधान की कल्याणकारी भावना के अनुरूप है।

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने बजट को दिशाहीन बताते हुए कहा कि इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे बुनियादी मुद्दों पर कोई ठोस दृष्टिकोण नहीं दिखता। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बजट आम जनता के बजाय चुनिंदा उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने वाला है और सरकार की जनविरोधी सोच को उजागर करता है।

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