नई दिल्ली:राउज एवेन्यू कोर्ट ने भगोड़े हथियार व्यापारी संजय भंडारी की संपत्तियों को जब्त करने से जुड़ी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अदालत इस मामले में 16 फरवरी को अपना आदेश सुनाएगी। संजय भंडारी को पहले ही भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया जा चुका है।
ईडी ने अदालत से भारत, दुबई और ब्रिटेन में स्थित भंडारी की कथित बेनामी संपत्तियों को जब्त करने की मांग की है। इनमें दिल्ली के वसंत विहार, पंचशील शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, शाहपुर जाट के साथ-साथ नोएडा और गुरुग्राम में मौजूद जमीनें और इमारतें शामिल हैं। एजेंसी का यह भी दावा है कि उनकी पत्नी के नाम पर 100 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां और बैंक खातों में जमा राशि भी वास्तव में भंडारी की ही है।
सुनवाई के दौरान भंडारी के वकील ने ईडी की संपत्ति सूची पर सवाल उठाते हुए कहा कि एजेंसी ने कथित बेनामी संपत्तियों को अलग-अलग श्रेणियों में वर्गीकृत नहीं किया है। उन्होंने यह भी कहा कि कई संपत्तियों का विवरण तो दिया गया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि वे बेनामी कैसे हैं। इस आधार पर वकील ने सूची की दोबारा जांच की मांग की।
ईडी ने इन दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि भगोड़े आरोपी को इस स्तर पर सुनवाई का अधिकार नहीं है। एजेंसी ने दोहराया कि 2020 में दाखिल की गई सूची में शामिल सभी संपत्तियां संजय भंडारी की ही हैं। ईडी ने भंडारी की पत्नी के उस दावे को भी खारिज किया, जिसमें उन्होंने संपत्तियों को अपनी निजी बताया था। एजेंसी के मुताबिक, भंडारी ने अवैध कमाई को बेनामी संपत्तियों में निवेश कर मनी लॉन्ड्रिंग की है।
यह मामला ब्लैक मनी (अघोषित विदेशी आय एवं संपत्ति) अधिनियम और फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर्स एक्ट के तहत चल रहा है। संजय भंडारी 2016 में आयकर विभाग की छापेमारी के बाद देश छोड़कर लंदन भाग गए थे।
अदालत का 16 फरवरी का फैसला इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की दिशा तय करेगा और ईडी के लिए अहम साबित हो सकता है।

