रांची : रिम्स की सरकारी जमीन बेचने वाले भू-माफिया गिरोह का भंडाफोड़, एसीबी ने चार आरोपियों को किया गिरफ्तार

Shashi Bhushan Kumar

झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) की अधिग्रहित भूमि को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अवैध रूप से बेचने वाले गिरोह के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने बड़ी कार्रवाई की है।

एसीबी की टीम ने मंगलवार को इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिन पर रैयतों की फर्जी वंशावली बनाकर जमीन की खरीद-बिक्री में धोखाधड़ी करने के गंभीर आरोप हैं। एसीबी की ओर से दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो रांची थाना कांड संख्या 1/2026 के तहत की गई है।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों में रांची के सदर थाना क्षेत्र निवासी राजकिशोर बड़ाईक, कार्तिक बड़ाईक, राजेश कुमार झा और खूंटी जिले के तोरपा निवासी चैतन कुमार शामिल हैं। इन अभियुक्तों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (संशोधित 2018) के तहत मामला दर्ज कर जांच की जा रही थी।

एसीबी की जांच में यह खुलासा हुआ है कि इन आरोपियों ने आपसी मिलीभगत से रिम्स की अधिग्रहित भूमि को निजी संपत्ति दिखाने के लिए फर्जी वंशावली तैयार की थी। इस फर्जी दस्तावेज के सहारे आरोपियों ने व्यक्तिगत आर्थिक लाभ के लिए सरकारी जमीन की अवैध खरीद-बिक्री की।

ब्यूरो की ओर से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, आरोपियों के विरुद्ध पुख्ता साक्ष्य मिलने के बाद यह गिरफ्तारी सुनिश्चित की गई है।

इस कार्रवाई से राजधानी के भू-माफिया सिंडिकेट में हड़कंप मच गया है। फिलहाल पुलिस आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजने के साथ-साथ इस मामले में शामिल अन्य संदिग्धों की भी तलाश कर रही है।

उल्लेखनीय है कि झारखंड हाईकोर्ट के आदेश पर पिछले महीने रिम्स की अधिग्रहित जमीन पर अतिक्रमण और अवैध कब्जा हटाने के लिए प्रशासन ने बड़ा अभियान चलाया था। इसी दौरान जमीन की अवैध तरीके से खरीद-बिक्री के मामलों का खुलासा हुआ था।

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शशी भूषण कुमार | पत्रकार (Journalist)- शशी भूषण कुमार 12+ वर्षों के अनुभव वाले पत्रकार हैं। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में कार्य करते हुए वर्तमान में Live 7 TV.com में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में संपादकीय नेतृत्व और न्यूज़ प्लानिंग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वे पिछले तीन वर्षों से झारखंड स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी में पत्रकारिता विभाग के गेस्ट फैकल्टी भी हैं। ग्रामीण पत्रकारिता पर शोध कार्य से जुड़े रहते हुए वे जमीनी और आदिवासी क्षेत्रों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
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