RANCHI
झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन जंगली हाथियों के हमलों में हो रही लगातार मौतों का मुद्दा जोर-शोर से उठा। हालिया घटनाओं में दस से अधिक लोगों की जान जाने के बाद सदन परिसर में विरोध की आवाज तेज हो गई।
मांडू क्षेत्र के विधायक निर्मल महतो ने विधानसभा की सीढ़ियों पर बैनर के साथ धरना दिया और राज्य सरकार तथा वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। उनका कहना था कि हाथियों की गतिविधियों की प्रभावी निगरानी नहीं हो पा रही है, जिसके कारण वे अचानक गांवों और शहरी इलाकों में पहुंचकर जान-माल का नुकसान कर रहे हैं।
विधायक ने आरोप लगाया कि कई दिनों तक हाथियों की सटीक स्थिति का पता नहीं चल पाता, जिससे स्थानीय लोग असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने इसे प्रशासनिक उदासीनता का परिणाम बताया। साथ ही खनन क्षेत्रों में अवैध कोयला व लोहा चोरी तथा रात में होने वाली विस्फोट गतिविधियों पर भी चिंता जताई। उनके अनुसार इन कारणों से हाथियों के प्राकृतिक आवास प्रभावित हो रहे हैं और वे आबादी की ओर रुख कर रहे हैं।
मृतकों के परिजनों को मिलने वाली चार लाख रुपये की सहायता राशि को अपर्याप्त बताते हुए उन्होंने मुआवजा बढ़ाकर 20 से 30 लाख रुपये करने की मांग की। इसके अलावा प्रभावित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की भी बात कही गई। क्षतिग्रस्त मकानों के मामलों में पूर्ण पुनर्निर्माण सुनिश्चित करने और हाथी-मानव संघर्ष से निपटने के लिए ठोस नीति बनाने की मांग भी उठाई गई।
विरोध प्रदर्शन के दौरान यह मुद्दा राज्य की वन नीति, पुनर्वास व्यवस्था और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा से भी जुड़ता नजर आया, जिससे सदन परिसर का राजनीतिक माहौल गरमा गया।

