मारवाड़ी महाविद्यालय में धूमधाम से मना खोरठा दिवस, श्रीनिवास पानूरी जयंती पर एकदिवसीय संगोष्ठी आयोजित

Ravikant Upadhyay

रांची। मारवाड़ी महाविद्यालय, रांची में जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा (खोरठा) विभाग द्वारा “खोरठा दिवस/श्रीनिवास पानूरी जयंती सह एकदिवसीय संगोष्ठी-2025” का आयोजन अत्यंत भव्यता और उत्साह के साथ किया गया। यह कार्यक्रम महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. मनोज कुमार के निर्देशानुसार सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। आयोजन का उद्देश्य खोरठा भाषा के संरक्षण, संवर्धन और विकास पर विमर्श करना तथा इसके पुरोधा स्वर्गीय श्रीनिवास पानूरी के योगदान को स्मरण करना था।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि खोरठा भाषाविद डॉ. विनोद कुमार रहे, जबकि विशिष्ट अतिथियों में मेजर डॉ. महेश्वर सारंगी, डॉ. अरविंद कुमार साव, डॉ. राहुल कुमार, डॉ. निरंजन कुमार, डॉ. राजेंद्र कुमार महतो एवं श्री महादेव प्रसाद शामिल थे। अतिथियों का पारंपरिक अंदाज़ में मांदर-नगाड़े की थाप, तिलक और पुष्पवर्षा के साथ स्वागत किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत श्रीनिवास पानूरी के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। स्वागत भाषण देते हुए खोरठा भाषा विभाग के सहायक प्राध्यापक सह एएनओ (एनसीसी) लेफ्टिनेंट डॉ. अवध बिहारी महतो ने कहा कि श्रीनिवास पानूरी ने न केवल खोरठा साहित्य की रचना की, बल्कि भाषा को आगे बढ़ाने का ऐतिहासिक कार्य भी किया। उन्होंने कहा कि खोरठा दिवस केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि भाषा और संस्कृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी की याद दिलाता है।

मुख्य अतिथि डॉ. विनोद कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि खोरठा भाषा के विकास में श्रीनिवास पानूरी का योगदान अविस्मरणीय है। उन्होंने संघर्षपूर्ण जीवन के बावजूद पान-गुमटी से साहित्य सृजन कर यह सिद्ध किया कि संकल्प मजबूत हो तो कोई बाधा बड़ी नहीं होती। उन्होंने युवाओं से मातृभाषा में लेखन और शोध करने का आह्वान किया।

अन्य वक्ताओं ने भी खोरठा भाषा पर गर्व करने, इसके प्रयोग को बढ़ाने और आधुनिक तकनीक व आईटी से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। वक्ताओं ने कहा कि खोरठा झारखंड की द्वितीय राजभाषा है और इसे रोजगार सृजन से जोड़कर और अधिक सशक्त बनाया जा सकता है।

कार्यक्रम के दौरान इस वर्ष से ‘भुवनेश्वरदत्त शर्मा व्याकुल साहित्य सेवा सम्मान’ की शुरुआत की घोषणा की गई, जिसे वर्ष 2025 के लिए डॉ. विनोद कुमार को प्रदान किए जाने की घोषणा हुई। कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं, शोधार्थियों और एनसीसी कैडेटों ने खोरठा भाषा में अपने विचार और गीत प्रस्तुत कर आयोजन को और भी जीवंत बना दिया।

कार्यक्रम का संचालन सहायक प्राध्यापक डॉ. अमित कुमार ने किया। अंत में लेफ्टिनेंट डॉ. अवध बिहारी महतो ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों, मीडिया प्रतिनिधियों, कर्मचारियों और एनसीसी कैडेटों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही खोरठा भाषा का संरक्षण और विकास संभव है।

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