झारखंड हाईकोर्ट ने सरकार को दिया आदेश, राज्य में बिना रजिस्ट्रेशन संचालित न हो कोई हॉस्पिटल

Shashi Bhushan Kumar

झारखंड में अब बिना पंजीकरण के किसी भी अस्पताल या क्लिनिक का संचालन नहीं किया जा सकेगा। इस संबंध में झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को सख्त निर्देश दिए हैं कि क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट (पंजीकरण और नियमन) अधिनियम, 2010 को प्रभावी तरीके से लागू किया जाए।

सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस दीपक रोशन की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि कानून मौजूद होने के बावजूद राज्य में इसका पालन संतोषजनक नहीं है। यह आदेश रांची निवासी रंजीव रंजन द्वारा दायर जनहित याचिका के निपटारे के दौरान दिया गया।

अदालत ने निर्देश दिया कि राज्य में संचालित सभी अस्पतालों और क्लिनिकों का पंजीकरण अनिवार्य रूप से कराया जाए। बिना रजिस्ट्रेशन के किसी भी स्वास्थ्य संस्था को संचालित होने की अनुमति नहीं दी जाए।

साथ ही, कोर्ट ने स्टेट काउंसिल फॉर क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट को निर्देश दिया कि राज्यभर के अस्पतालों और क्लिनिकों का एक अद्यतन रजिस्टर तैयार किया जाए। इस जानकारी को नियमित रूप से राष्ट्रीय रजिस्टर में भी अपडेट किया जाए और हर वर्ष अनुपालन रिपोर्ट प्रकाशित की जाए।

हाईकोर्ट ने जिला स्तर पर निरीक्षण व्यवस्था को मजबूत करने पर भी जोर दिया। अदालत ने सुझाव दिया कि समय-समय पर जांच के लिए विशेषज्ञों की फ्लाइंग स्क्वॉड टीम का गठन किया जा सकता है, ताकि नियमों के पालन की निगरानी सुनिश्चित हो सके।

इसके अलावा, कोर्ट ने कहा कि अस्पतालों और डॉक्टरों को मरीजों या उनके अधिकृत परिजनों को 72 घंटे के भीतर मेडिकल रिकॉर्ड उपलब्ध कराना होगा, जैसा कि संबंधित नियमों में प्रावधान है।

अदालत ने राज्य के स्वास्थ्य सेवा निदेशक को निर्देश दिया कि चार महीने के भीतर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल कर यह बताया जाए कि इन निर्देशों को लागू करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।

यह मामला एक जनहित याचिका के माध्यम से सामने आया था, जिसमें स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठाए गए थे। अदालत ने व्यक्तिगत स्तर के आरोपों पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि ऐसे मामलों के लिए संबंधित कानूनी मंच उपलब्ध हैं।

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शशी भूषण कुमार | पत्रकार (Journalist)- शशी भूषण कुमार 12+ वर्षों के अनुभव वाले पत्रकार हैं। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में कार्य करते हुए वर्तमान में Live 7 TV.com में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में संपादकीय नेतृत्व और न्यूज़ प्लानिंग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वे पिछले तीन वर्षों से झारखंड स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी में पत्रकारिता विभाग के गेस्ट फैकल्टी भी हैं। ग्रामीण पत्रकारिता पर शोध कार्य से जुड़े रहते हुए वे जमीनी और आदिवासी क्षेत्रों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
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