झारखंड सरकार का सख्त फैसला: मार्च में सिर्फ 15% बजट खर्च की अनुमति

Shashi Bhushan Kumar

झारखंड सरकार ने वित्तीय वर्ष के अंतिम महीने में अनियंत्रित खर्च पर लगाम लगाने के लिए सख्त कदम उठाया है। रांची कोषागार द्वारा जारी नए निर्देशों के अनुसार, अब सभी विभाग मार्च में अपने कुल वार्षिक बजट का अधिकतम 15 प्रतिशत ही खर्च कर सकेंगे। इससे अधिक राशि की निकासी के लिए वित्त विभाग से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

चालू वित्तीय वर्ष का कुल बजट लगभग 1.40 लाख करोड़ रुपये है। अब तक करीब 70 प्रतिशत राशि खर्च की जा चुकी है, जबकि शेष 30 प्रतिशत राशि बची हुई है। अधिकारियों का मानना है कि इतनी बड़ी राशि को एक ही महीने में खर्च करना व्यावहारिक नहीं है। इसी को ध्यान में रखते हुए वित्तीय अनुशासन बनाए रखने और मार्च में होने वाली जल्दबाजी वाली खर्च प्रवृत्ति को रोकने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है।

निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि अप्रैल से सितंबर तक बजट की 50 प्रतिशत राशि और अक्टूबर से मार्च तक शेष 50 प्रतिशत राशि खर्च करने का प्रावधान है। हालांकि, कई विभाग साल के अंतिम महीने में तेजी से निकासी कर बजट समाप्त करने की कोशिश करते हैं, जिससे वित्तीय असंतुलन की स्थिति बन जाती है।

कोषागार ने सभी विभागों और जिला स्तरीय अधिकारियों को निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा है। जानकारी के अनुसार, कृषि, ऊर्जा, पथ निर्माण, ग्रामीण विकास, स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा, कल्याण और नगर विकास जैसे कई विभागों ने 31 जनवरी तक 50 प्रतिशत से भी कम बजट खर्च किया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बजट आवंटन और खर्च की वर्तमान प्रणाली में सुधार की जरूरत है। कई बार जरूरत से अधिक राशि का प्रावधान कर दिया जाता है, जिससे वित्तीय वर्ष के अंत में जल्दबाजी में खर्च की प्रवृत्ति बढ़ जाती है। ऐसे में पारदर्शिता और निगरानी तंत्र को मजबूत करना आवश्यक है।

सरकार के इस फैसले से उम्मीद है कि मार्च में होने वाले अनावश्यक और जल्दबाजी में किए जाने वाले खर्च पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।

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शशी भूषण कुमार | पत्रकार (Journalist)- शशी भूषण कुमार 12+ वर्षों के अनुभव वाले पत्रकार हैं। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में कार्य करते हुए वर्तमान में Live 7 TV.com में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में संपादकीय नेतृत्व और न्यूज़ प्लानिंग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वे पिछले तीन वर्षों से झारखंड स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी में पत्रकारिता विभाग के गेस्ट फैकल्टी भी हैं। ग्रामीण पत्रकारिता पर शोध कार्य से जुड़े रहते हुए वे जमीनी और आदिवासी क्षेत्रों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
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