RANCHI
झारखंड हाईकोर्ट ने रांची के तीन प्रमुख जलस्रोतों—कांके डैम, धुर्वा डैम और गेतलसुद डैम—के आसपास हो रहे अतिक्रमण को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है। अदालत ने रांची के उपायुक्त से शपथ पत्र के माध्यम से विस्तृत जानकारी मांगी है कि इन डैमों के लिए कुल कितनी भूमि अधिग्रहित की गई थी, वर्तमान में कितनी जमीन पर कब्जा है और अतिक्रमण हटाने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।
अदालत ने यह भी पूछा है कि क्या इन डैमों और उनके कैचमेंट एरिया का कभी आधिकारिक सर्वे कराया गया है। इसके अलावा, पिछली सुनवाई में दिए गए निर्देशों के अनुपालन की रिपोर्ट रांची नगर निगम से भी मांगी गई है। मामले की अगली सुनवाई 26 मार्च को होगी।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता शाहबाज अख्तर ने बताया कि हिनू, हरमू नदी किनारे और धुर्वा डैम क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने के लिए प्रशासन लगातार कार्रवाई कर रहा है, हालांकि कुछ स्थानों पर अदालत के स्थगन आदेश के कारण कार्रवाई रुकी हुई है।
एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने अदालत को बताया कि धुर्वा डैम के किनारे अवैध निर्माण, जमीन की फर्जी रसीद काटने और नक्शा स्वीकृति देने के मामले में दोषी अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। इन मामलों में एसीबी ने भी अलग से एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मामले में एमिकस क्यूरी इंद्रजीत सिन्हा ने अदालत को बताया कि तीनों डैमों के कैचमेंट एरिया में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हो चुका है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट पहले भी इस संबंध में कई आदेश जारी कर चुका है, लेकिन प्रभावी कार्रवाई अब तक नहीं हुई है। उन्होंने कांके डैम की स्थिति को सबसे गंभीर बताते हुए चेतावनी दी कि वहां बढ़ता कब्जा भविष्य में जल संकट पैदा कर सकता है।

