दिल्ली जनकपुरी हादसा: एफआईआर में खुलासा—गड्ढे पर कोई चेतावनी, बैरिकेड या रोशनी नहीं थी

Shashi Bhushan Kumar

नई दिल्ली: दिल्ली के जनकपुरी इलाके में सड़क पर खुले गड्ढे में गिरकर एक युवक की मौत के मामले में दर्ज एफआईआर में गंभीर लापरवाही सामने आई है। जांच में पाया गया कि गड्ढे के आसपास न तो कोई चेतावनी बोर्ड लगाया गया था, न बैरिकेड, रिफ्लेक्टर या पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था थी। इस लापरवाही के कारण 25 वर्षीय कमल की जान चली गई।

यह हादसा गुरुवार देर रात करीब 11 से 12 बजे के बीच हुआ। कमल, जो एक निजी बैंक के कॉल सेंटर में काम करते थे, रोहिणी स्थित अपने ऑफिस से बाइक से घर लौट रहे थे। वे अपने माता-पिता की शादी की सालगिरह के लिए केक लेकर घर जा रहे थे। उन्होंने अपने जुड़वां भाई और दोस्त को फोन कर बताया था कि वे 10–15 मिनट में पहुंच जाएंगे, लेकिन इसके बाद उनसे संपर्क टूट गया।

परिवार और दोस्तों ने पूरी रात उनकी तलाश की और कई थानों के चक्कर लगाए, लेकिन पुलिस ने गुमशुदगी की शिकायत दर्ज नहीं की। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने 24 घंटे पूरे होने का हवाला दिया। मोबाइल लोकेशन ट्रैक करने की कोशिश भी पूरी तरह कारगर नहीं रही।

शुक्रवार सुबह करीब 8 बजे जनकपुरी थाने को पीसीआर कॉल मिली कि बी-3बी ब्लॉक, आंध्रा स्कूल के पास सड़क पर एक बड़े गड्ढे में बाइक सवार गिरा पड़ा है। मौके पर पहुंची पुलिस ने पाया कि दिल्ली जल बोर्ड द्वारा सीवर लाइन के लिए खोदा गया यह गड्ढा करीब 15–20 फीट लंबा, 13–14 फीट चौड़ा और 14–15 फीट गहरा था और सड़क के बीचों-बीच स्थित था। फायर ब्रिगेड की मदद से कमल और उनकी बाइक को बाहर निकाला गया, लेकिन अस्पताल में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

पोस्टमॉर्टम में पेट के ऊपरी हिस्से में गंभीर चोटें पाई गईं। क्राइम और फॉरेंसिक टीम की जांच में स्पष्ट हुआ कि गड्ढे को बिना किसी सुरक्षा इंतजाम के खुला छोड़ दिया गया था।

पुलिस ने बीएनएस की धारा 105 (गैर-इरादतन हत्या) के तहत ठेकेदार और दिल्ली जल बोर्ड के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। दिल्ली सरकार ने इस मामले में तीन इंजीनियरों को निलंबित भी कर दिया है।

यह घटना सड़क सुरक्षा और सरकारी एजेंसियों की लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। मृतक के परिवार ने न्याय की मांग की है, जबकि स्थानीय लोगों में इस तरह की घटनाओं को लेकर आक्रोश बढ़ रहा है।

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Digital Head,Live-7, Committed to impactful journalism, Shashi Bhushan Kumar continues to bring meaningful narratives to the public with diligence and passion. Active Journalist since 2012.
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