चौरी चौरा दिवस : वह ऐतिहासिक घटना जिसने स्वतंत्रता आंदोलन की धारा बदल दी

Shashi Bhushan Kumar

नई दिल्ली, 4 फरवरी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में एक अविस्मरणीय तारीख है। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के निकट स्थित छोटा-सा कस्बा चौरी चौरा उस घटना का गवाह बना, जिसने आजादी की लड़ाई की दिशा और रणनीति दोनों को प्रभावित किया। 1922 में यहीं हुई एक हिंसक घटना ने पूरे राष्ट्रीय आंदोलन को नए सिरे से सोचने पर मजबूर कर दिया।

भारत के स्वतंत्रता संघर्ष की नींव असंख्य बलिदानों और संघर्षपूर्ण घटनाओं पर टिकी है। इनमें चौरी चौरा कांड का विशेष स्थान है। इस घटना ने न केवल ब्रिटिश शासन को चुनौती दी, बल्कि अहिंसा और जनआंदोलन की सीमाओं पर भी गंभीर बहस छेड़ दी। यह प्रसंग दर्शाता है कि जब जनता का आक्रोश अनियंत्रित हो गया, तो महात्मा गांधी जैसे नेतृत्व को भी कठोर निर्णय लेने पड़े।

4 फरवरी 1922 को असहयोग आंदोलन के दौरान चौरी चौरा में एक बड़ा टकराव हुआ। ब्रिटिश प्रशासन की दमनकारी नीतियों से नाराज भीड़ ने स्थानीय पुलिस चौकी पर हमला कर दिया। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि चौकी में आग लगा दी गई, जिसमें 22-23 पुलिसकर्मियों की मौत हो गई। यह घटना इतिहास में “चौरी चौरा कांड” के रूप में दर्ज हुई।

इस घटना ने महात्मा गांधी को गहरे आत्ममंथन के लिए प्रेरित किया। उनका मानना था कि हिंसा के माध्यम से स्वतंत्रता प्राप्त नहीं की जा सकती। इसी विचार के आधार पर उन्होंने असहयोग आंदोलन को वापस लेने का निर्णय लिया। हालांकि इस फैसले की उस समय व्यापक आलोचना हुई, लेकिन बाद के इतिहासकार मानते हैं कि इस घटना ने आंदोलन को नई वैचारिक दिशा दी और अहिंसा बनाम हिंसा की बहस को और गहरा किया।

चौरी चौरा कांड के बाद ब्रिटिश सरकार ने बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां कीं और मुकदमे चलाए। इन अभियुक्तों का बचाव महान शिक्षाविद और स्वतंत्रता सेनानी पंडित मदन मोहन मालवीय ने किया। उनकी कानूनी लड़ाई को एक बड़ी नैतिक और न्यायिक सफलता माना जाता है, जिसने औपनिवेशिक न्याय व्यवस्था की कठोरता पर सवाल खड़े किए।

आज चौरी चौरा केवल एक ऐतिहासिक स्थल नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्मृति का प्रतीक है। यहां स्थित शहीद स्मारक और संग्रहालय स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत को संजोए हुए हैं।

यात्रा के लिए गोरखपुर से देवरिया जाने वाली अधिकांश ट्रेनें चौरी चौरा रेलवे स्टेशन पर रुकती हैं। गोरखपुर जंक्शन से इसकी दूरी लगभग 24–25 किलोमीटर है। इसके अलावा, गोरखपुर हवाई अड्डे से टैक्सी द्वारा भी यहां पहुंचा जा सकता है, जिसकी दूरी करीब 30–40 किलोमीटर है। गोरखपुर और देवरिया से नियमित बस सेवाएं भी उपलब्ध हैं।

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