रांची में आइसा का प्रदर्शन: जेएनयू छात्रों की रिहाई और संदिग्ध मौतों की सीबीआई जांच की मांग

Shashi Bhushan Kumar

ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के आह्वान पर शुक्रवार को अल्बर्ट एक्का चौक, रांची में ऑल इंडिया प्रोटेस्ट डे के तहत प्रदर्शन किया गया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के छात्रों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई का विरोध जताया और 14 छात्रों की तिहाड़ जेल से रिहाई की मांग उठाई।

प्रदर्शन में उषा मार्टिन यूनिवर्सिटी की बीकॉम की आदिवासी छात्रा और भोपाल में एमबीबीएस की एक आदिवासी छात्रा की संदिग्ध मौत के मामलों की केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की मांग भी की गई। संगठन ने इन मामलों में पारदर्शी और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की बात कही।

आइसा के रांची जिला अध्यक्ष विजय कुमार ने कहा कि जेएनयू के 14 छात्रों की रिहाई, घटनाओं की सीबीआई से न्यायिक जांच, विश्वविद्यालय प्रशासन की जवाबदेही तय करने और छात्र हितों से जुड़े मुद्दों पर व्यापक एकजुटता जरूरी है। उन्होंने सरकार पर छात्र विरोधी रुख अपनाने का आरोप लगाया।

जिला सचिव संजना मेहता ने बताया कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ (जेएनयूएसयू) के आह्वान पर हजारों छात्र शिक्षा मंत्रालय की ओर मार्च कर रहे थे। उनकी मांगों में छात्रसंघ के चार पदाधिकारियों और पूर्व अध्यक्ष के निलंबन को वापस लेने, कुलपति के इस्तीफे तथा यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन को प्रभावी रूप से लागू करने की मांग शामिल थी।

उन्होंने आरोप लगाया कि मार्च के दौरान पुलिस ने कई छात्रों को हिरासत में लिया और 14 छात्रों को तिहाड़ जेल भेज दिया गया। संगठन का कहना है कि जमानत मिलने के बाद भी पते के सत्यापन का हवाला देकर छात्रों को जेल में रखा गया, जिसे उन्होंने प्रशासन की साजिश करार दिया।

प्रदर्शन में विजय कुमार, संजना मेहता, पूर्व राज्य अध्यक्ष सोहेल अंसारी, डीएसपीएमयू सह सचिव पीयूष कुमार सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।

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शशी भूषण कुमार | पत्रकार (Journalist)- शशी भूषण कुमार 12+ वर्षों के अनुभव वाले पत्रकार हैं। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में कार्य करते हुए वर्तमान में Live 7 TV.com में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में संपादकीय नेतृत्व और न्यूज़ प्लानिंग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वे पिछले तीन वर्षों से झारखंड स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी में पत्रकारिता विभाग के गेस्ट फैकल्टी भी हैं। ग्रामीण पत्रकारिता पर शोध कार्य से जुड़े रहते हुए वे जमीनी और आदिवासी क्षेत्रों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
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