असम पुलिस का पवन खेड़ा के घर छापा, सीएम हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी ने दर्ज कराई थी एफआईआर

Shashi Bhushan Kumar

नई दिल्ली, असम पुलिस की टीम कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के दिल्ली आवास पर पहुंच गई है। यह कार्रवाई असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा द्वारा सोमवार को दर्ज कराई एफआईआर के बाद की गई। पवन खेड़ा ने हिमंता बिस्वा सरमा और उनकी पत्नी पर विदेशों में संपत्ति रखने, विदेशी पासपोर्ट रखने और वित्तीय लेन-देन में गड़बड़ी के आरोप लगाए थे।

दरअसल, पवन खेड़ा ने दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि चुनावों के बाद हिमंता और उनकी पत्नी क्या फरार होने वाले हैं? उन्होंने आरोप लगाया था कि रिनिकी भुइयां सरमा के पास यूएई, एंटीगुआ और मिस्र के पासपोर्ट हैं और उन्होंने विदेशों में संपत्तियां छिपाई हैं। इसके साथ ही उन्होंने एक अमेरिकी कंपनी के साथ वित्तीय संबंधों की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) बनाने की मांग भी की थी।

इसके बाद हिमंता बिस्वा सरमा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में पवन खेड़ा के आरोपों का जवाब दिया। सरमा ने कहा कि कांग्रेस ने उनकी पत्नी के नाम पर फर्जी पासपोर्ट और कंपनी रिकॉर्ड प्रसारित कर एक नया निचला स्तर छू लिया है। उन्होंने चेतावनी दी थी कि यह मामला आपराधिक साजिश के तहत गंभीर कानूनी परिणाम ला सकता है और अगर आवश्यक हुआ तो पवन खेड़ा को आजीवन कारावास का सामना भी करना पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा था कि कांग्रेस द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों में कई स्पष्ट विसंगतियां हैं और इस पर विश्वास नहीं किया जा सकता।

इस पूरे मामले ने असम की राजनीतिक हलचलों को और बढ़ा दिया है। आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति तेज हो गई है। इस बीच सोमवार को मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर के बाद असम पुलिस दिल्ली पहुंच गई है और स्थानीय पुलिस की सहायता से पवन खेड़ा के घर छापा मार रही है।

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शशी भूषण कुमार | पत्रकार (Journalist)- शशी भूषण कुमार 12+ वर्षों के अनुभव वाले पत्रकार हैं। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में कार्य करते हुए वर्तमान में Live 7 TV.com में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में संपादकीय नेतृत्व और न्यूज़ प्लानिंग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वे पिछले तीन वर्षों से झारखंड स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी में पत्रकारिता विभाग के गेस्ट फैकल्टी भी हैं। ग्रामीण पत्रकारिता पर शोध कार्य से जुड़े रहते हुए वे जमीनी और आदिवासी क्षेत्रों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
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