निशिकांत दुबे ने कांग्रेस के इतिहास पर उठाए सवाल, कहा-1962 का युद्ध अमेरिका के पैसे से लड़ा गाया

Shashi Bhushan Kumar

नई दिल्ली, भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस के इतिहास को लेकर कई गंभीर दावे किए हैं। उन्होंने कहा कि आज ही के दिन 27 मार्च 1963 को ओडिशा के तत्कालीन मुख्यमंत्री बीजू पटनायक अमेरिका पहुंचे थे और उस दौर में भारत, अमेरिका और तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के बीच अहम कड़ी का काम कर रहे थे।

निशिकांत दुबे ने इस बात की जानकारी ‘एक्स’ पोस्ट के जरिए दी। भाजपा सांसद ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “1962 में चीन के साथ हुआ युद्ध अमेरिका के कहने और उसकी आर्थिक मदद से लड़ा गया था। उन्होंने यह भी दावा किया कि दलाई लामा के भाई अमेरिका के संपर्क में थे और 1959 में दलाई लामा अमेरिकी सहायता से भारत पहुंचे थे।”

उन्होंने आगे लिखा कि 1963-64 के दौरान भारत ने अमेरिका की सेना को उत्तराखंड के नंदा देवी क्षेत्र में परमाणु परीक्षण से जुड़े उपकरण रखने की अनुमति दी थी। साथ ही, अमेरिकी जासूसी विमान यू-2 के लिए ओडिशा के चरबतिया हवाई अड्डे का इस्तेमाल भी कराया गया था।

सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस पर चुनावी फंडिंग को लेकर भी सवाल उठाए। उनका दावा है कि 1955 से 1962 के बीच हुए सभी चुनावों में अमेरिका और सीआईए (केंद्रीय खुफिया एजेंसी) ने कांग्रेस पार्टी को आर्थिक मदद दी। उस समय के अमेरिकी राजदूत ने अपनी किताब में यह तक लिखा कि केरल के चुनाव में इंदिरा गांधी को सीधे तौर पर पैसे दिए गए थे। इस मुद्दे पर संसद में बहस भी हुई थी और एक समिति का गठन किया गया था। उन्होंने इसे कांग्रेस का काला अध्याय बताया।

इन दावों के सामने आने के बाद एक बार फिर इतिहास और राजनीति को लेकर नई बहस छिड़ गई है। फिलहाल कांग्रेस की ओर से इसे लेकर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

बता दें कि निशिकांत दुबे झारखंड के गोड्डा निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा सांसद हैं। वह अपनी बयानबाजी और संसद में विपक्ष विशेषकर कांग्रेस पर तीखे हमलों के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने एमबीए में पीएचडी की डिग्री प्राप्त की है।

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शशी भूषण कुमार | पत्रकार (Journalist)- शशी भूषण कुमार 12+ वर्षों के अनुभव वाले पत्रकार हैं। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में कार्य करते हुए वर्तमान में Live 7 TV.com में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में संपादकीय नेतृत्व और न्यूज़ प्लानिंग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वे पिछले तीन वर्षों से झारखंड स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी में पत्रकारिता विभाग के गेस्ट फैकल्टी भी हैं। ग्रामीण पत्रकारिता पर शोध कार्य से जुड़े रहते हुए वे जमीनी और आदिवासी क्षेत्रों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
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