अनिल अंबानी की कंपनी आरकॉम पर 1,085 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप, सीबीआई ने दर्ज किया केस

Shashi Bhushan Kumar

मुंबई, उद्योगपति अनिल अंबानी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (आरकॉम) और अन्य के खिलाफ 2013 से 2017 के बीच कथित तौर पर किए गए 1,085 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी मामले में नया आपराधिक मामला दर्ज किया है। यह केस पंजाब नेशनल बैंक की शिकायत पर दर्ज किया गया है।

आरकॉम पर वित्तीय अनुशासन का उल्लंघन करने, गबन करने और मंजूरी की शर्तों का उल्लंघन करने का आरोप लगा है। आरबीआई के दिशानिर्देशों के अनुसार, 2017 में आरकॉम के खाते को निष्पादित (एनपीए) घोषित कर दिया गया था। इससे पहले सीबीआई ने बैंक ऑफ बड़ौदा से जुड़े 2,200 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी मामले में अनिल अंबानी और आरकॉम के खिलाफ दूसरी एफआईआर दर्ज की थी।

इसके पहले 6 मार्च को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उद्योगपति अनिल अंबानी और रिलायंस पावर से जुड़े कई कारोबारियों और संस्थाओं के ठिकानों पर छापेमारी की थी। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में करीब 10 से 12 जगहों पर ये छापे मारे गए थे। ईडी की करीब 15 विशेष टीमों ने सुबह-सुबह तलाशी अभियान शुरू किया। यह कार्रवाई उन लोगों के रजिस्टर्ड ऑफिस और घरों पर की गई जो इस पावर कंपनी से किसी न किसी तरह जुड़े हुए थे।

आधिकारिक बयान के अनुसार, इससे पहले ईडी ने अनिल अंबानी के आलीशान पाली हिल स्थित ‘अबोड’ नामक आवासीय संपत्ति को अस्थायी रूप से अटैच किया था, जिसकी कीमत करीब 3,716.83 करोड़ रुपए बताई गई है। यह कार्रवाई रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड से जुड़े बैंक धोखाधड़ी मामले में की गई थी।

प्रवर्तन निदेशालय के विशेष कार्य बल, मुख्यालय ने यह संपत्ति धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत जब्त की है। इससे पहले इसी संपत्ति के एक हिस्से को 473.17 करोड़ रुपए तक जब्त किया जा चुका था।

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शशी भूषण कुमार | पत्रकार (Journalist)- शशी भूषण कुमार 12+ वर्षों के अनुभव वाले पत्रकार हैं। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में कार्य करते हुए वर्तमान में Live 7 TV.com में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में संपादकीय नेतृत्व और न्यूज़ प्लानिंग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वे पिछले तीन वर्षों से झारखंड स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी में पत्रकारिता विभाग के गेस्ट फैकल्टी भी हैं। ग्रामीण पत्रकारिता पर शोध कार्य से जुड़े रहते हुए वे जमीनी और आदिवासी क्षेत्रों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
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