नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना, बिहार की जनता का अपमान : राकेश सिन्हा

Shashi Bhushan Kumar

रांची, झारखंड के कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा ने कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का अचानक राज्यसभा जाने का फैसला सीधे तौर पर बिहार की जनता का अपमान है। सत्ता में आने के बाद उन्हें पद से हटाना जनादेश की उपेक्षा है।

कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा ने कहा कि बिहार की जनता ने 2025 के विधानसभा चुनाव में पांच साल सरकार चलाने के लिए नीतीश कुमार के चेहरे पर एनडीए को भारी बहुमत दिया। अब नीतीश कुमार राज्यसभा जा रहे हैं तो यह जनता के जनादेश का अपमान है।

उन्होंने भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि यह कोई नई बात नहीं है। हमेशा से यह उम्मीद थी कि नीतीश कुमार को किनारे कर दिया जाएगा और बिहार के जनादेश का अपमान किया जाएगा, क्योंकि भारतीय जनता पार्टी जनता के जनादेश का अपमान करने में माहिर है। यह साफ तौर पर जनादेश का उल्लंघन है। बिहार विधानसभा चुनाव में जनता ने भाजपा को वोट नहीं दिया बल्कि भाजपा ने नीतीश कुमार के नाम पर वोट लिया। अब भाजपा ने नीतीश कुमार को साइडलाइन कर दिया है, जो भाजपा चाहती थी, उसमें सफल हुई।

बिहार के नए गवर्नर को लेकर कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा ने कहा कि कई गवर्नर बदले गए और कई ने इस्तीफ़ा भी दे दिया। ऐसा क्यों हुआ और किन हालात में हुआ। इससे पता चलता है कि कहीं न कहीं, केंद्र सरकार कुछ बड़ी योजना बना रही है। कुछ बड़ा करने वाली है और हमें लगता है कि जनता को सचेत रहने की जरूरत है, कुछ बड़ा हो सकता है।

उन्होंने अमेरिका द्वारा भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए 30 दिन की छूट देने पर कहा कि भारत अमेरिका की कठपुतली बन गया है। इस मामले पर भारत जैसे देश का अपना स्टैंड होना चाहिए लेकिन फिलहाल यह हो नहीं पा रहा है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार को एक्स पर पोस्ट के माध्यम से इस बात की जानकारी साझा की थी कि वे अब बिहार से निकलकर राज्यसभा जाना चाहते हैं। नीतीश कुमार ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में राज्यसभा उम्मीदवार के तौर पर नामांकन पत्र भी दाखिल कर दिया है।

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शशी भूषण कुमार | पत्रकार (Journalist)- शशी भूषण कुमार 12+ वर्षों के अनुभव वाले पत्रकार हैं। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में कार्य करते हुए वर्तमान में Live 7 TV.com में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में संपादकीय नेतृत्व और न्यूज़ प्लानिंग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वे पिछले तीन वर्षों से झारखंड स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी में पत्रकारिता विभाग के गेस्ट फैकल्टी भी हैं। ग्रामीण पत्रकारिता पर शोध कार्य से जुड़े रहते हुए वे जमीनी और आदिवासी क्षेत्रों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
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