नई दिल्ली, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय समन्वय के साथ साइबर अपराध के खिलाफ व्यापक कार्रवाई करते हुए ‘ऑपरेशन साइस्ट्राइक’ नाम से अभियान चलाया। इस अभियान में अमेरिका की एफबीआई सहित ब्रिटेन, कुवैत, आयरलैंड और सिंगापुर की जांच एजेंसियों ने भी सहयोग किया। इसका उद्देश्य सीमा पार से संचालित होने वाले साइबर-आधारित वित्तीय अपराध नेटवर्क पर शिकंजा कसना था।
सीबीआई ने दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में कुल 35 स्थानों पर छापेमारी की। जांच में सामने आया कि ये गिरोह फर्जी पहचान और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर भारत सहित कई देशों के लोगों से ऑनलाइन ठगी कर रहे थे।
दिल्ली में सक्रिय एक बड़े गिरोह को ध्वस्त किया गया, जो अमेरिकी नागरिकों को निशाना बना रहा था। छापेमारी के दौरान लैपटॉप, मोबाइल फोन और हार्ड डिस्क जैसे कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए, जिनमें अपराध से जुड़े डिजिटल सबूत मिले। मौके से एक प्रमुख आरोपी को गिरफ्तार भी किया गया।
एक अन्य गिरोह का भंडाफोड़ नई दिल्ली, गाजियाबाद और कर्नाटक में हुआ, जो कुवैत में नौकरी और ई-वीजा दिलाने के नाम पर लोगों को ठग रहा था। जांच में नकली कुवैती ई-वीजा और जॉब ऑफर लेटर बरामद हुए, साथ ही एक आरोपी से 60 लाख रुपये नकद भी जब्त किए गए।
इसके अलावा ब्रिटेन, आयरलैंड और सिंगापुर के नागरिकों को ठगने वाले नेटवर्क की पहचान कर उनकी गतिविधियों को रोक दिया गया और उनसे जुड़े बैंक खातों को फ्रीज किया गया।
सीबीआई के नेतृत्व में इंटरपोल और अन्य विदेशी एजेंसियों के साथ मिलकर चलाए गए इस अभियान को साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी पर लगाम लगाने में मदद मिली है।

