इस्लामाबाद — पाकिस्तान के अशांत प्रांत बलूचिस्तान में करीब 40 घंटे तक चले सैन्य अभियान में 140 से अधिक लोगों की मौत हो गई है। स्थानीय मीडिया के अनुसार, यह कार्रवाई प्रांत में हुए समन्वित बंदूक और बम हमलों के जवाब में की गई।
प्रांतीय मुख्यमंत्री सरफराज बुगती के हवाले से बताया गया कि सुरक्षा बलों ने व्यापक अभियान चलाया, जिसमें बड़ी संख्या में संदिग्ध उग्रवादी मारे गए। पाकिस्तान की सेना की मीडिया शाखा इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) ने दावा किया कि इस अभियान में 92 लड़ाके मारे गए, जबकि 15 आम नागरिक भी अपनी जान गंवा बैठे।
मुख्यमंत्री बुगती ने कहा कि हमलों में पुलिस और फ्रंटियर कोर सहित विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के 17 जवान मारे गए। इसके अलावा, नौसेना के एक अधिकारी की भी मौत हुई। कुल मिलाकर 31 सुरक्षाकर्मी और नागरिक मारे गए, जबकि कई लोग घायल हुए हैं।
दक्षिण-पश्चिमी बलूचिस्तान में हाल के वर्षों की यह सबसे घातक हिंसा मानी जा रही है। यह प्रांत प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है और इसकी सीमाएं ईरान तथा अफगानिस्तान से लगती हैं। यहां सक्रिय विद्रोही समूहों ने हाल के समय में सुरक्षा बलों, नागरिकों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हमले बढ़ा दिए हैं।
पाकिस्तान के उप गृह मंत्री तलाल चौधरी ने कहा कि हमलावर आम नागरिकों के वेश में अस्पतालों, स्कूलों, बैंकों और बाजारों में घुसे और अचानक गोलीबारी शुरू कर दी। उनके अनुसार, कई मामलों में नागरिकों को मानव ढाल के रूप में इस्तेमाल किया गया।
इन हमलों की जिम्मेदारी अलगाववादी संगठन बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने ली है। संगठन ने दावा किया कि उसने ‘हीरोफ’ या ‘काला तूफान’ नामक अभियान के तहत पूरे बलूचिस्तान में सुरक्षा बलों को निशाना बनाया। बीएलए का कहना है कि उसने 80 से अधिक जवानों को मार गिराया और 18 को बंधक बना लिया, हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा लेकिन सबसे पिछड़ा प्रांत है। यहां दशकों से अलगाववादी विद्रोह जारी है। बलूच समूह लंबे समय से अधिक स्वायत्तता और प्राकृतिक संसाधनों में अधिक हिस्सेदारी की मांग कर रहे हैं।

