वॉशिंगटन — दिव्यांग अधिकारों के लिए काम करने वाली अमेरिकी गैर-लाभकारी संस्था द वॉयस ऑफ स्पेशली एबल्ड पीपल (VOSAP) ने भारत के केंद्रीय बजट 2026-27 की सराहना की है। संगठन का कहना है कि बजट में कौशल, रोजगार और सहायक सुविधाओं से जुड़े नए प्रावधान दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं।
वीओएसएपी ने कहा कि बजट में शामिल योजनाएं दिव्यांगजनों को आर्थिक मुख्यधारा से जोड़ने में मददगार साबित होंगी और उन्हें बेहतर अवसर प्रदान करेंगी।
संस्था के संस्थापक प्रणव देसाई ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि दिव्यांगजनों के लिए उनकी दीर्घकालिक योजना ‘विजन 2047’ को बजट से नई गति मिली है। इस दृष्टिकोण के तहत दिव्यांग लोगों की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने के लिए दो नई पहल शुरू की गई हैं।
वीओएसएपी के विजन 2047 का उद्देश्य दिव्यांगजनों को भारत के दीर्घकालिक विकास में समान भागीदार बनाना है, जिसमें सम्मानजनक जीवन, समान अवसर और सामाजिक भागीदारी पर जोर दिया गया है।
संगठन के अनुसार, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में दिव्यांगजन कौशल योजना और दिव्यांग सहारा योजना की घोषणा की है। इन योजनाओं का लक्ष्य दिव्यांगजनों को कौशल प्रशिक्षण देना, रोजगार के अवसर बढ़ाना और सहायक तकनीक उपलब्ध कराना है।
वीओएसएपी ने कहा, “बजट 2026 में दिव्यांगजनों की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने के लिए दो नए कार्यक्रमों की शुरुआत विजन 2047 के लिए बड़ा प्रोत्साहन है।” इन योजनाओं से दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी। विशेष रूप से दिव्यांगजन कौशल योजना के तहत उनकी जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण और व्यावसायिक शिक्षा दी जाएगी, जिससे रोजगार की संभावनाएं बढ़ेंगी।
संगठन ने वित्त मंत्री को बधाई देते हुए कहा कि ये कदम ‘विकसित भारत’ के लिए एक समावेशी इकोसिस्टम बनाने में सहायक होंगे, जहां गरिमा, सुलभता और समान अवसर विकास का आधार बनेंगे।
दिव्यांग सहारा योजना के तहत दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण और तकनीक उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे वे अधिक स्वतंत्र रूप से जीवन जी सकें और काम कर सकें।
वीओएसएपी ने यह भी कहा कि ये योजनाएं सुलभ भारत अभियान के उद्देश्यों के अनुरूप हैं, क्योंकि इनका मकसद कौशल, रोजगार और तकनीक से जुड़ी बाधाओं को कम करना है।
हालांकि, संस्था ने इस बात पर भी जोर दिया कि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन बेहद जरूरी होगा, तभी उनका वास्तविक लाभ दिव्यांगजनों तक पहुंच पाएगा।
उल्लेखनीय है कि भारत में लाखों दिव्यांग लोग आज भी शिक्षा, रोजगार और सार्वजनिक सुविधाओं तक पहुंच में कई चुनौतियों का सामना करते हैं।

