नई दिल्ली: दिल्ली के साकेत जिला न्यायालय ने हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 13 फरवरी की तारीख तय की है।
यह मामला अल-फलाह ग्रुप के चेयरमैन जावेद अहमद सिद्दीकी और अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट से जुड़ा है, जिन्हें ईडी ने आरोपी बनाया है। एजेंसी ने जनवरी 2026 में अदालत में चार्जशीट दाखिल करते हुए आरोप लगाया था कि यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े संस्थानों के माध्यम से अवैध वित्तीय लेनदेन किए गए।
ईडी की जांच में सामने आया है कि कथित तौर पर फर्जी राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) मान्यता दिखाकर छात्रों से फीस वसूली गई और सरकारी एजेंसियों को गुमराह किया गया। इसके अलावा फर्जी डॉक्टरों की नियुक्ति और अन्य वित्तीय अनियमितताओं के भी सबूत मिलने का दावा किया गया है।
इस प्रकरण की जांच नवंबर 2025 में दिल्ली के लाल किले के पास हुए कार बम विस्फोट से जुड़े मामले से शुरू हुई थी, जिसमें अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े कुछ व्यक्तियों का नाम सामने आया था। इसके बाद ईडी ने कार्रवाई करते हुए यूनिवर्सिटी की करीब 140 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां जब्त कर ली थीं, जिनमें लगभग 54 एकड़ जमीन और अन्य भवन शामिल हैं।
हालिया सुनवाई के दौरान जावेद अहमद सिद्दीकी के वकील ने चार्जशीट से जुड़े दस्तावेजों का अध्ययन करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। साथ ही सिद्दीकी की न्यायिक हिरासत को बढ़ाते हुए मामले को 13 फरवरी के लिए सूचीबद्ध किया गया।
यह केस धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत चल रहा है। ईडी का दावा है कि सिद्दीकी ने ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी पर पूर्ण नियंत्रण रखा और अवैध कमाई का मुख्य लाभार्थी रहा। जांच एजेंसी के मुताबिक, इस मामले में करोड़ों रुपये की वित्तीय गड़बड़ी और छात्रों के साथ कथित धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है।
आगामी सुनवाई में चार्जशीट पर औपचारिक संज्ञान लेने, आरोप तय करने और सबूतों पर विस्तृत बहस होने की संभावना है। कानूनी जानकारों का मानना है कि यह मामला शिक्षा क्षेत्र में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

