RANCHI
आईएसडीजी रिसर्च फाउंडेशन की ओर से अशोक नगर स्थित अमलतास बैंक्वेट हॉल में ज्ञानशाला FLN कॉन्क्लेव ‘डहर’ का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन का उद्देश्य Foundational Literacy and Numeracy (FLN) के क्षेत्र में जमीनी अनुभवों, नवाचारों और आपसी सहयोग पर आधारित संवाद को आगे बढ़ाना रहा।

उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि आईआईएम रांची के निदेशक डॉ. दीपक कुमार श्रीवास्तव ने प्रारंभिक शिक्षा में अनुभवात्मक सीख (Experiential Learning) के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि छोटे, निरंतर और जमीनी स्तर पर किए गए प्रयास ही शिक्षा व्यवस्था में दीर्घकालिक बदलाव की नींव रखते हैं। FLN के संदर्भ में उन्होंने “Small is beautiful” और “Power of small” की अवधारणा को प्रभावी बताया।

विशिष्ट अतिथि एवं यूनिसेफ की शिक्षा विशेषज्ञ पारुल शर्मा ने बच्चों की सीखने की प्रक्रिया में अभिभावकों और समुदाय की सक्रिय भागीदारी को अहम बताया। वहीं सामाजिक अंकेक्षण के निदेशक हलधर महतो ने प्रारंभिक शिक्षा में गुणवत्ता, जवाबदेही और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप कार्यप्रणाली पर अपने विचार साझा किए।
आईएसडीजी रिसर्च फाउंडेशन के निदेशक कुमार देवाशीष ने ज्ञानशाला कार्यक्रम की अब तक की यात्रा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह पहल किस तरह समुदाय-आधारित मॉडल के जरिए बच्चों की बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक क्षमता को मजबूत कर रही है।
कार्यक्रम के दौरान आयोजित ‘ज्ञानदूत संवाद’ सत्र में जमीनी स्तर पर कार्यरत शिक्षकों ने अपने कक्षा अनुभव, चुनौतियों और बच्चों में दिखे सकारात्मक बदलावों को साझा किया। इसके साथ ही शिक्षण-अधिगम सामग्री (TLM) की प्रदर्शनी भी प्रतिभागियों के आकर्षण का केंद्र रही।
विशेषज्ञ पैनल चर्चा में विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने झारखंड में FLN की वर्तमान स्थिति, बहु-स्तरीय कक्षाओं की रणनीतियाँ, समुदाय की भूमिका और तकनीक के उपयोग जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की। वक्ताओं ने FLN लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए सरकार, नागरिक समाज और समुदाय के साझा प्रयासों को जरूरी बताया।
सम्मेलन में शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े कई संगठनों और प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसे स्नेहा मिश्रा ने प्रस्तुत किया। आयोजन में आईएसडीजी रिसर्च फाउंडेशन की पूरी टीम की सक्रिय भागीदारी और सहयोग सराहनीय रहा।

