नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट द्वारा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए रेगुलेशन पर अंतरिम रोक लगाए जाने के बाद इस मुद्दे पर प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। किसान नेता राकेश टिकैत ने यूजीसी के नए नियमों को लेकर चिंता जताते हुए कहा है कि इससे देश में मुकदमेबाजी बढ़ सकती है।
राकेश टिकैत ने कहा कि बीते कुछ दिनों से यूजीसी के नए रेगुलेशन का व्यापक विरोध हो रहा था, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए संबंधित दस्तावेज पेश करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि नियमों में क्या खामियां हैं, किन बिंदुओं पर संशोधन की जरूरत है या इन्हें रोका जाएगा, यह न्यायालय के निर्णय के बाद स्पष्ट होगा।
किसान नेता ने कहा कि जिन वर्गों या समुदायों को इन नियमों से आपत्ति है, उनके साथ संवाद किया जाना चाहिए। उन्होंने आशंका जताई कि यदि विवादित नीतियां इसी तरह लागू की जाती रहीं, तो समाज में विभाजन बढ़ सकता है, जिससे किसी संकट की स्थिति में देश को एकजुट रखना कठिन हो जाएगा।
टिकैत ने कहा कि यूजीसी के नए रेगुलेशन से आम लोगों को नुकसान हो सकता है, जबकि सरकार पर इसका विशेष प्रभाव नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि असंतोष और मतदान से दूरी जैसी स्थितियों का लाभ अंततः सत्ता में बैठे लोगों को ही मिलता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की नीतियों से समाज को जातियों में बांटने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है, जिससे कानूनी विवादों की संख्या में इजाफा होगा। टिकैत ने कहा कि संविधान के तहत सभी नागरिकों को समान अधिकार मिले हैं और किसी भी कार्रवाई को उसी दायरे में रहकर किया जाना चाहिए।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को यूजीसी के नए नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए इन पर रोक लगा दी है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी और तब तक वर्ष 2012 के यूजीसी रेगुलेशन ही लागू रहेंगे।

