नई दिल्ली: कश्मीरी अलगाववादी नेता यासीन मलिक से जुड़े टेरर फंडिंग मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को अपना जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का अतिरिक्त समय प्रदान किया है। इस मामले में अब अगली सुनवाई 22 अप्रैल को होगी।
बुधवार को जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की खंडपीठ ने इस प्रकरण पर सुनवाई की। एनआईए की ओर से समय बढ़ाने का अनुरोध किया गया था, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। कोर्ट ने कहा कि अपीलकर्ता पक्ष को चार हफ्ते का और समय दिया जाता है और मामले को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाता है।
एनआईए ने ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें यासीन मलिक को आतंकी फंडिंग के मामले में आजीवन कारावास की सजा दी गई थी। ट्रायल कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि यह मामला ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ की श्रेणी में नहीं आता, इसलिए मौत की सजा नहीं दी जा सकती। हालांकि, एनआईए का कहना है कि अपराध की प्रकृति और गंभीरता को देखते हुए यासीन मलिक को मृत्युदंड दिया जाना चाहिए।
इससे पहले नवंबर 2025 में हुई सुनवाई के दौरान एनआईए ने अपील की सुनवाई इन-कैमरा कराने की मांग की थी। कोर्ट ने तब कहा था कि एजेंसी द्वारा औपचारिक आवेदन दायर किए जाने के बाद इस पर विचार किया जाएगा। एजेंसी ने प्राइवेट वर्चुअल लिंक के माध्यम से सुनवाई कराने का भी आग्रह किया था।
वहीं, तिहाड़ जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए यासीन मलिक ने अपील पर निर्णय में लंबे समय से हो रही देरी को लेकर मानसिक पीड़ा की बात कही थी। अपने हलफनामे में उन्होंने दावा किया था कि 1990 के बाद से केंद्र में रही अलग-अलग सरकारों ने कश्मीर मुद्दे पर उनसे बातचीत की थी।
गौरतलब है कि यह मामला वर्ष 2017 के टेरर फंडिंग केस से जुड़ा है। एनआईए के अनुसार, यासीन मलिक पर हवाला के जरिए फंडिंग, पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से संबंध और जम्मू-कश्मीर में हिंसा व अशांति फैलाने के गंभीर आरोप हैं। एजेंसी का दावा है कि 1990 के दशक में कई हत्याओं और अपहरण की घटनाओं में मलिक की भूमिका रही है। एनआईए ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ मामला बताते हुए मृत्युदंड की मांग की है।

