पेसा नियमावली पर बाबूलाल मरांडी का बड़ा हमला, हेमंत सरकार से पुनर्विचार की मांग

Shashi Bhushan Kumar

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने झारखंड सरकार द्वारा जारी पेसा नियमावली पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि हेमंत सरकार जनजातीय समाज की रूढ़िवादी परंपराओं, विश्वास और उपासना पद्धतियों को कमजोर करने का प्रयास कर रही है।

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि हेमंत सरकार ऐसी व्यवस्था बनाना चाहती है, जिसमें रूढ़िवादी विश्वास और पारंपरिक उपासना पद्धति को छोड़ चुके लोगों को भी ग्रामसभा का अध्यक्ष बनाया जा सके, जो पेसा अधिनियम की मूल भावना के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी सत्ता के लिए आदिवासियों के अधिकारों से समझौता कर रही है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 1996 में केंद्र की कांग्रेस सरकार द्वारा बनाए गए पेसा एक्ट का उद्देश्य देशभर के 700 से अधिक जनजातीय समूहों की पारंपरिक सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक व्यवस्थाओं को सशक्त करना था। पेसा एक्ट की धारा 4(क) में स्पष्ट उल्लेख है कि राज्य द्वारा बनाई जाने वाली पंचायत व्यवस्था, रूढ़िजन्य विधि, सामाजिक एवं धार्मिक प्रथाओं और समुदाय के पारंपरिक संसाधन प्रबंधन के अनुरूप होनी चाहिए।

मरांडी ने कहा कि रूढ़िजन्य विधि का अर्थ जनजातीय समाज की आस्था, विश्वास और उपासना पद्धति से है, जो अलग-अलग जनजातियों में भिन्न होती है। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि संथाल समाज मरांग बुरू और जाहिर आयो में विश्वास करता है तथा जाहिर थान और मांझी थान में पूजा करता है। इसी प्रकार मुंडा, उरांव, हो और खड़िया समाज की भी अपनी विशिष्ट धार्मिक मान्यताएं और परंपराएं हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि हेमंत सरकार की पेसा नियमावली में “परंपरा” और “रीति-रिवाज” जैसे शब्द तो जोड़े गए हैं, लेकिन “रूढ़िवादी विश्वास” शब्द को जानबूझकर शामिल नहीं किया गया, जिससे आदिवासी समाज में असंतोष है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति पारंपरिक विश्वास और उपासना पद्धति को छोड़ चुका है, उसे ग्रामसभा अध्यक्ष बनने का अधिकार नहीं दिया जाना चाहिए।

बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री से मांग की कि नियमावली में पेसा एक्ट की भाषा को अक्षरशः शामिल किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार नियमावली पर पुनर्विचार नहीं करती है, तो भाजपा इसे जनजातीय समाज के अधिकारों पर हमला मानते हुए गांव-गांव जाकर जनता की अदालत में सरकार के फैसले को ले जाएगी।

इस प्रेस वार्ता में भाजपा मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक, प्रवक्ता प्रदीप सिन्हा और सह मीडिया प्रभारी अशोक बड़ाइक भी उपस्थित रहे।

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