झारखंड को मिल सकता है नया डीजीपी, एम.एस. भाटिया का नाम चर्चा में सबसे आगे

Shashi Bhushan Kumar

नए साल 2026 की शुरुआत के साथ ही झारखंड को नया पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) मिलने की संभावना प्रबल हो गई है। राज्य में डीजीपी पद को लेकर मंथन तेज हो गया है और चर्चाओं में 1993 बैच के आईपीएस अधिकारी एम.एस. भाटिया का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, 31 दिसंबर की देर शाम तक नए डीजीपी के नाम की घोषणा संभव है।

वर्तमान में झारखंड की प्रभारी डीजीपी तदाशा मिश्र की सेवा अवधि 31 दिसंबर को समाप्त हो रही है। इसके बाद राज्य की कानून-व्यवस्था की कमान किस अधिकारी को सौंपी जाएगी, इस पर सरकार के भीतर गंभीर विचार-विमर्श चल रहा है। बताया जा रहा है कि राज्य सरकार तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नामों पर मंथन कर रही है।

अब तक राज्य सरकार की ओर से डीजीपी नियुक्ति के लिए यूपीएससी को पैनल नहीं भेजा गया है। ऐसे में यह संभावना जताई जा रही है कि झारखंड कैबिनेट से पूर्व में स्वीकृत नियमावली के प्रावधानों के तहत ही डीजीपी की नियमित नियुक्ति की जा सकती है।

डीजीपी पद की दौड़ में जिन तीन वरिष्ठ अधिकारियों के नाम सामने आए हैं, उनमें सबसे पहला नाम 1990 बैच के आईपीएस अधिकारी अनिल पालटा का है। वे बिहार और झारखंड के कई जिलों में एसपी रह चुके हैं और एक सख्त व अनुशासित अधिकारी के रूप में पहचाने जाते हैं। पलामू में पदस्थापन के दौरान नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में व्यापक कॉम्बिंग अभियान चलाकर उन्होंने उग्रवादियों पर दबाव बनाया था। डीजी रैंक पर प्रोन्नति के बाद वे डीजी होमगार्ड एंड फायर सर्विस के पद पर भी कार्य कर चुके हैं और वर्तमान में रेल डीजी के रूप में पदस्थापित हैं।

दूसरे दावेदार 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी प्रशांत सिंह हैं। उन्हें भी राज्य के अनुभवी और सक्षम अधिकारियों में गिना जाता है। उन्होंने बिहार और झारखंड में करीब 32 वर्षों तक विभिन्न जिलों में एसपी और पुलिस मुख्यालय में अलग-अलग महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। फिलहाल वे डीजी वायरलेस के पद पर कार्यरत हैं।

डीजीपी की रेस में तीसरा और सबसे चर्चित नाम 1993 बैच के आईपीएस अधिकारी एम.एस. भाटिया का है। उन्हें राज्य के तेज-तर्रार अधिकारियों में शामिल किया जाता है। वे कई जिलों में एसपी रह चुके हैं और रांची के जोनल आईजी के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। इसके अलावा वे लंबे समय तक सीआरपीएफ में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर रहे हैं। केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से लौटने के बाद वर्तमान में वे डीजी होमगार्ड एंड फायर सर्विस के पद पर पदस्थापित हैं।

सूत्रों के मुताबिक, मौजूदा परिस्थितियों में डीजीपी पद की दौड़ में एम.एस. भाटिया पहले स्थान पर, प्रशांत सिंह दूसरे और अनिल पालटा तीसरे स्थान पर बताए जा रहे हैं। हालांकि अंतिम फैसला सरकार के स्तर पर लिया जाना है, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

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