नई दिल्ली: बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव की गिरफ्तारी के बाद उनके समर्थकों ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार दिया है। समर्थकों ने गिरफ्तारी के समय और तरीके पर भी सवाल उठाए हैं।
पप्पू यादव के समर्थक नीतीश सिंह ने कहा कि जब भी वे बिहार से जुड़े अहम मुद्दे उठाते हैं, उन्हें परेशान किया जाता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा, बेरोजगारी और न्याय जैसे मुद्दों पर आवाज उठाने के बाद ही उनके खिलाफ कार्रवाई होती है। उन्होंने यह भी दावा किया कि नीट से जुड़े एक मामले को संसद में उठाने के बाद सरकार ने उन्हें निशाना बनाया।
उन्होंने पप्पू यादव के स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि डॉक्टरों के अनुसार उनकी हालत स्थिर नहीं है और फिलहाल कई डॉक्टर उनकी देखरेख कर रहे हैं।
एक अन्य समर्थक गौतम आनंद ने गिरफ्तारी की वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा कि संसद सत्र के दौरान एक मौजूदा सांसद को आधी रात में गिरफ्तार किया जाना गलत है और कानूनी रूप से आपत्तिजनक है।
सुजीत यादव ने कहा कि पप्पू यादव हमेशा छात्रों और गरीबों के लिए लड़ते रहे हैं और असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए उन्हें जानबूझकर परेशान किया जा रहा है। वहीं नवल किशोर यादव ने आरोप लगाया कि बिहार में लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर हो रही है और कानून-व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक है।
इस बीच पुलिस ने कहा है कि गिरफ्तारी पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है। एसपी सिटी भानु प्रताप सिंह के अनुसार, यह कार्रवाई 1995 के एक मामले में अदालत द्वारा जारी संपत्ति अटैचमेंट वारंट के आधार पर की गई है और गिरफ्तारी के बाद उन्हें मेडिकल जांच के लिए अस्पताल ले जाया गया।
अधिकारियों के मुताबिक, पप्पू यादव को शुक्रवार देर रात उनके घर से गिरफ्तार किया गया। यह कार्रवाई अदालत की सुनवाई में बार-बार अनुपस्थित रहने के कारण की गई।
यह मामला 1995 में गर्दनीबाग थाना क्षेत्र में दर्ज एक धोखाधड़ी विवाद से जुड़ा है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि उनकी संपत्ति को गलत तरीके से सांसद के कार्यालय के रूप में इस्तेमाल किया गया, जबकि यह बात किराए के समझौते के समय स्पष्ट नहीं की गई थी।

