वीर बाल दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साहिबजादों को किया नमन, कहा– उनका बलिदान पीढ़ियों को देता रहेगा प्रेरणा

Ravikant Upadhyay

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को वीर बाल दिवस के अवसर पर सिखों के दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के साहिबजादों को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके सर्वोच्च बलिदान को नमन किया। उन्होंने इस दिन को श्रद्धा, साहस और अडिग विश्वास का प्रतीक बताते हुए कहा कि वीर बाल दिवस हमें इतिहास के उन पन्नों की याद दिलाता है, जहां कम आयु में भी अद्वितीय वीरता, धर्मनिष्ठा और सत्य के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया गया।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपने संदेश में लिखा कि वीर बाल दिवस बहादुर साहिबजादों के बलिदान को स्मरण करने के लिए समर्पित है। उन्होंने माता गुजरी जी के अटूट विश्वास और श्री गुरु गोबिंद सिंह जी की अमर शिक्षाओं को भी याद किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि साहिबजादों का जीवन साहस, दृढ़ आस्था और धर्मपरायणता का प्रतीक है, जो आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा।

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भी इस अवसर पर साहिबजादों के बलिदान को नमन करते हुए कहा कि कम उम्र में भी उन्होंने धर्म, सत्य और साहस की जो मिसाल पेश की, वह युगों-युगों तक प्रेरणास्रोत बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि वीर साहिबजादों का त्याग भारतीय इतिहास की अमूल्य धरोहर है।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने वीर बाल दिवस को केवल इतिहास का स्मरण नहीं, बल्कि युवा पीढ़ी के संस्कार, साहस और राष्ट्रबोध के निर्माण का राष्ट्रीय संकल्प बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी पहल से वीर बाल दिवस की शुरुआत हुई, ताकि साहिबजादों का अद्वितीय त्याग देश की चेतना और भविष्य की दिशा तय करने वाली प्रेरणा बने।

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने भी साहिबजादों के बलिदान को नमन करते हुए कहा कि उनका अदम्य साहस और देशप्रेम हमें अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की शक्ति देता है। उन्होंने कहा कि साहिबजादों का जीवन और बलिदान आज के युवाओं के लिए मार्गदर्शक है।

गौरतलब है कि वीर बाल दिवस हर वर्ष 26 दिसंबर को मनाया जाता है। यह दिन गुरु गोबिंद सिंह जी के छोटे पुत्र साहिबजादा बाबा जोरावर सिंह और साहिबजादा बाबा फतेह सिंह की शहादत को समर्पित है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 9 जनवरी 2022 को गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाश पर्व के अवसर पर वीर बाल दिवस मनाने की घोषणा की थी।

इतिहास के अनुसार, साहिबजादा बाबा जोरावर सिंह और साहिबजादा बाबा फतेह सिंह का जन्म आनंदपुर साहिब में हुआ था। 7 दिसंबर 1705 को ऐतिहासिक चमकौर की लड़ाई के दौरान दोनों साहिबजादों को उनकी दादी माता गुजरी जी के साथ मुगल अधिकारियों द्वारा मोरिंडा में हिरासत में लिया गया था। अल्पायु में भी उन्होंने धर्म परिवर्तन से इनकार करते हुए अत्याचार के सामने झुकने से मना कर दिया और वीरगति को प्राप्त हुए।

वीर बाल दिवस आज पूरे देश में साहस, बलिदान और धर्म के प्रति अटूट निष्ठा का संदेश देता है। यह दिन न केवल इतिहास को स्मरण करने का अवसर है, बल्कि युवाओं में राष्ट्रप्रेम, नैतिक मूल्यों और साहस को जागृत करने का भी एक सशक्त माध्यम बन चुका है।

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