आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत सूचीबद्ध अस्पतालों की संख्या बढ़कर हुई 36,229, 11.69 करोड़ लोगों का हुआ इलाज

Shashi Bhushan Kumar

नई दिल्ली, आयुष्मान भारत योजना के तहत 28 फरवरी 2026 तक कुल 11.69 करोड़ लोगों को अस्पताल में भर्ती होने की मंजूरी दी गई, जिनमें से 6.74 करोड़ भर्ती निजी अस्पतालों में हुई। यह जानकारी सरकार ने सोमवार को संसद में दी।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने लोकसभा में लिखित जवाब में बताया कि यह सुनिश्चित करने के लिए सख्त दिशा-निर्देश लागू हैं कि अस्पताल योजना के लाभार्थियों को इलाज देने से मना न करें।

अगर किसी मरीज को इलाज से मना किया जाता है या कोई गड़बड़ी होती है, तो वह सेंट्रलाइज्ड ग्रिवांस सिस्टम के जरिए शिकायत कर सकता है या चौबीसो घंटे टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 14555 पर कॉल कर सकता है।

मंत्री ने बताया कि इस योजना के तहत शिकायतों के समाधान के लिए जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तीन स्तर की व्यवस्था बनाई गई है। हर स्तर पर नोडल अधिकारी और शिकायत निवारण समितियां मौजूद हैं, जो मामलों की जांच कर समाधान करती हैं।

सरकार ने यह भी बताया कि इस योजना से जुड़े अस्पतालों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई है। 2018-19 में जहां 6,917 अस्पताल जुड़े थे, वहीं 28 फरवरी 2026 तक यह संख्या बढ़कर 36,229 हो गई है। इनमें 19,483 सरकारी और 16,746 निजी अस्पताल शामिल हैं, जिससे देश भर में एक बड़ा हेल्थकेयर नेटवर्क तैयार हुआ है।

मंत्री ने कहा कि अस्पतालों को योजना में जोड़ने की प्रक्रिया लगातार जारी रहती है और यह राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा जरूरत और उपलब्ध सुविधाओं के आधार पर की जाती है।

दावों (क्लेम) के निपटान को लेकर सरकार ने कहा कि यह प्रक्रिया नियमित और बिना रुकावट के चल रही है। राज्य स्वास्थ्य एजेंसियां तय समय सीमा के भीतर क्लेम का निपटान करती हैं, जिसमें राज्य के अंदर इलाज के मामलों में 15 दिन में और दूसरे राज्य में इलाज (पोर्टेबिलिटी) के मामलों में 30 दिन के भीतर निपटान किया जाता है।

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शशी भूषण कुमार | पत्रकार (Journalist)- शशी भूषण कुमार 12+ वर्षों के अनुभव वाले पत्रकार हैं। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में कार्य करते हुए वर्तमान में Live 7 TV.com में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में संपादकीय नेतृत्व और न्यूज़ प्लानिंग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वे पिछले तीन वर्षों से झारखंड स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी में पत्रकारिता विभाग के गेस्ट फैकल्टी भी हैं। ग्रामीण पत्रकारिता पर शोध कार्य से जुड़े रहते हुए वे जमीनी और आदिवासी क्षेत्रों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
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