झारखंड विधानसभा में अंचल कार्यालयों में भ्रष्टाचार का मुद्दा उठा, भाजपा विधायकों ने सरकार को घेरा

Shashi Bhushan Kumar

झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन अंचल कार्यालयों की कार्यप्रणाली, दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) में देरी और कथित भ्रष्टाचार का मुद्दा प्रमुखता से उठा। भाजपा विधायकों ने अंचल अधिकारियों पर लापरवाही और आम लोगों से अवैध वसूली के आरोप लगाते हुए सरकार से जवाब मांगा।

कोडरमा की विधायक नीरा यादव ने कहा कि वर्ष 2022 से लागू सुओ-मोटो दाखिल-खारिज व्यवस्था का लाभ जमीनी स्तर पर लोगों को नहीं मिल पा रहा है। जमीन निबंधन के बाद भी म्यूटेशन में देरी हो रही है, जिससे नागरिकों को परेशानी उठानी पड़ रही है। उन्होंने यह भी कहा कि जाति, आवासीय और आय प्रमाण पत्र के लिए छात्रों और अभिभावकों को बार-बार अंचल कार्यालय जाना पड़ता है, इसलिए विशेष शिविर आयोजित किए जाने चाहिए।

रांची के विधायक सीपी सिंह ने राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग से जुड़े मामलों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि एक ही भूखंड पर बार-बार म्यूटेशन होना व्यवस्था की कमजोरी को दर्शाता है। उनका आरोप था कि आम नागरिकों को अपने काम के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं और प्रक्रिया पारदर्शी नहीं दिखती।

बरही के विधायक मनोज यादव ने भी अंचल कार्यालयों में सुविधा शुल्क लेने के आरोप लगाए।

इन आरोपों पर जवाब देते हुए राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार मंत्री दीपक बिरुआ ने कहा कि राज्य में सेवा का अधिकार अधिनियम लागू है, जिसके तहत तय समय सीमा में सेवाएं प्रदान की जानी चाहिए। उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि किसी अधिकारी द्वारा नियमों का उल्लंघन पाया गया तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, प्रमाण पत्र से जुड़े मामलों के त्वरित निष्पादन के लिए विभागीय स्तर पर सख्त निर्देश जारी किए जाएंगे।

सदन में इस मुद्दे पर हुई चर्चा ने प्रशासनिक पारदर्शिता और सेवा वितरण व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए।

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शशी भूषण कुमार | पत्रकार (Journalist)- शशी भूषण कुमार 12+ वर्षों के अनुभव वाले पत्रकार हैं। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में कार्य करते हुए वर्तमान में Live 7 TV.com में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में संपादकीय नेतृत्व और न्यूज़ प्लानिंग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वे पिछले तीन वर्षों से झारखंड स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी में पत्रकारिता विभाग के गेस्ट फैकल्टी भी हैं। ग्रामीण पत्रकारिता पर शोध कार्य से जुड़े रहते हुए वे जमीनी और आदिवासी क्षेत्रों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
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