जुमे की नमाज से पहले श्रीनगर के लाल चौक इलाके में कड़े प्रतिबंध, लोगों की आवाजाही पर रोक

Shashi Bhushan Kumar

श्रीनगर, अमेरिका-इजरायल के हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद जम्मू-कश्मीर में जारी विरोध से यहां का माहौल काफी तनावपूर्ण बना हुआ है। खामेनेई की मौत को लेकर लोगों में गुस्सा है। इसी के विरोध में घाटी के कई इलाकों में पिछले दिनों प्रदर्शन भी देखने को मिले, जिसके बाद से सुरक्षा बल लगातार अलर्ट मोड पर हैं।

हालांकि अधिकारियों का कहना है कि अब धीरे-धीरे हालात सामान्य होने लगे हैं, लेकिन एहतियात के तौर पर कई जगहों पर पाबंदियां अभी भी जारी हैं। घाटी के कई हिस्सों में प्रतिबंध लगाए गए ताकि किसी तरह की हिंसा या टकराव की स्थिति न बने।

शुक्रवार की नमाज को देखते हुए प्रशासन ने श्रीनगर के मुख्य इलाके लाल चौक और आसपास के क्षेत्रों में कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जुमे की नमाज के बाद अक्सर भीड़ ज्यादा हो जाती है, इसलिए किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पहले से ही सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी गई है।

सिक्योरिटी डिपार्टमेंट के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक पूरे शहर में सुरक्षा और भी कड़ी की जाएगी। एहतियात के तौर पर लाल चौक की तरफ आम लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है। बिना जरूरी कारण किसी को भी उस इलाके में जाने या वहां से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

इसके अलावा, कश्मीर घाटी के दूसरे जिलों में भी सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है। संवेदनशील इलाकों में पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की अतिरिक्त टुकड़ियां लगाई गई हैं। जगह-जगह नाकाबंदी की गई है और कई चौराहों पर बैरिकेड लगाए गए हैं ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके।

प्रशासन का कहना है कि इन सभी कदमों का मकसद सिर्फ कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। अधिकारी लगातार हालात पर नजर रखे हुए हैं और लोगों से भी शांति बनाए रखने की अपील की जा रही है।

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शशी भूषण कुमार | पत्रकार (Journalist)- शशी भूषण कुमार 12+ वर्षों के अनुभव वाले पत्रकार हैं। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में कार्य करते हुए वर्तमान में Live 7 TV.com में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में संपादकीय नेतृत्व और न्यूज़ प्लानिंग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वे पिछले तीन वर्षों से झारखंड स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी में पत्रकारिता विभाग के गेस्ट फैकल्टी भी हैं। ग्रामीण पत्रकारिता पर शोध कार्य से जुड़े रहते हुए वे जमीनी और आदिवासी क्षेत्रों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
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