रांची पहुंचीं शिवहर की सांसद लवली आनंद, ‘क्षत्रिय एकता गौरव समागम’ में होंगी शामिल

Shashi Bhushan Kumar

15 मार्च 2026 को रांची में आयोजित होने वाले “क्षत्रिय एकता गौरव समागम” में शामिल होने के लिए बिहार के शिवहर से सांसद Lovely Anand शनिवार दोपहर Birsa Munda Airport पहुंचीं। उनके साथ समागम के एक अन्य अतिथि Anshuman Mohan भी मौजूद थे।

एयरपोर्ट पर क्षत्रिय महासभा और फ्रेंड्स ऑफ आनंद के कार्यकर्ताओं ने फूल-मालाओं और नारों के साथ उनका जोरदार स्वागत किया। स्वागत करने वालों में गोपाल सिंह, विभय सिंह ‘शाहदेव’, रमेश सिंह, पप्पू सिंह, गुड्डू सिंह, प्रशांत सिंह, गौरव सिंह, कुणाल शाहदेव, मिहिर शाहदेव, चिंतामणि शाहदेव और विनोद सिंह सहित कई कार्यकर्ता शामिल थे। वहीं नीतू सिंह, सविता सिंह और शोभा देवी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में महिलाओं ने भी अतिथियों का स्वागत किया।

रांची पहुंचने के बाद सांसद लवली आनंद ने Vishwanath Shahdeo की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उन्होंने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि झारखंड की राजनीति में कभी राजपूत समाज का प्रभाव सभी दलों में दिखाई देता था, लेकिन वर्तमान में उनकी राजनीतिक भागीदारी कम होती नजर आ रही है। उन्होंने कहा कि समाज अपनी एकता और अधिकारों की बात रखने के लिए एक मंच पर एकत्र हो रहा है और इसी उद्देश्य से “क्षत्रिय एकता गौरव समागम” आयोजित किया जा रहा है।

यूजीसी से जुड़े विवाद पर पूछे गए सवाल के जवाब में अंशुमन मोहन ने कहा कि वे किसी भी कानून को वापस लेने की बजाय उसमें आवश्यक संशोधन के पक्षधर हैं, ताकि उसके दुरुपयोग की संभावना खत्म हो सके और निर्दोष लोगों को परेशानी न हो। उन्होंने यह भी कहा कि जब मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है, तब तक सभी पक्षों को धैर्य बनाए रखना चाहिए और अदालत के निर्णय का इंतजार करना चाहिए।

दोनों नेताओं ने कहा कि रांची में होने वाला यह समागम कई मायनों में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है और समाज के लोगों को एक मंच पर लाकर संवाद और संगठन को मजबूत करने का प्रयास करेगा।

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शशी भूषण कुमार | पत्रकार (Journalist)- शशी भूषण कुमार 12+ वर्षों के अनुभव वाले पत्रकार हैं। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में कार्य करते हुए वर्तमान में Live 7 TV.com में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में संपादकीय नेतृत्व और न्यूज़ प्लानिंग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वे पिछले तीन वर्षों से झारखंड स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी में पत्रकारिता विभाग के गेस्ट फैकल्टी भी हैं। ग्रामीण पत्रकारिता पर शोध कार्य से जुड़े रहते हुए वे जमीनी और आदिवासी क्षेत्रों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
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