रांची के जगन्नाथपुर मंदिर मौसीबाड़ी स्थित मल्लार टोली से लापता हुए मासूम भाई-बहन अंश (5) और अंशिका (4) की तलाश के लिए पुलिस ने जांच और अभियान तेज कर दिया है। दोनों बच्चे बीते दो जनवरी से लापता हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए चार जनवरी को वरीय पुलिस अधीक्षक राकेश रंजन के निर्देश पर विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया गया है। इस एसआईटी का नेतृत्व सिटी एसपी पारस राणा और ग्रामीण एसपी प्रवीण पुष्कर कर रहे हैं।
पुलिस प्रशासन ने इस मामले में कुल आठ विशेष टीमों का गठन किया है, जिनमें चार डीएसपी और छह इंस्पेक्टर शामिल हैं। ये टीमें न सिर्फ झारखंड के अलग-अलग जिलों में बल्कि बिहार के छपरा, पटना और मनेर तथा उत्तर प्रदेश के बनारस और आसपास के इलाकों में भी बच्चों की तलाश कर रही हैं। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, बाजार, सीमावर्ती क्षेत्र और संदिग्ध ठिकानों पर लगातार छापेमारी और पूछताछ की जा रही है।
लापता बच्चों के पिता सुनील कुमार ने बताया कि वे करीब दो साल पहले बेहतर भविष्य और बच्चों की पढ़ाई के उद्देश्य से रांची आए थे। शुरुआती दिनों में उन्होंने सब्जी बेचकर परिवार का भरण-पोषण किया, बाद में भैंस खरीदकर दूध का व्यवसाय शुरू किया। करीब छह महीने पहले उनकी पत्नी नीतू और दोनों बच्चे भी रांची आ गए थे, जिसके बाद पूरा परिवार जगन्नाथपुर इलाके में रहने लगा।
सुनील कुमार के अनुसार, दो जनवरी को वह रोज की तरह दूध बांटकर दोपहर करीब 2.15 बजे घर लौटे थे। उसी दौरान बेटे अंश ने बिस्कुट खरीदने के लिए 10 रुपये मांगे। करीब 2.30 बजे अंश अपनी छोटी बहन अंशिका को साथ लेकर मोहल्ले की दुकान की ओर गया। बताया गया कि एक दुकान से दूसरी दुकान भेजे जाने के बाद दोनों बच्चों ने लॉलीपॉप खरीदा, लेकिन शाम तीन बजे तक वे घर वापस नहीं लौटे।
बच्चों के देर तक नहीं लौटने पर परिजनों ने पहले मोहल्ले, खटाल और आसपास के इलाकों में तलाश की, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। इसके बाद शाम करीब 5.30 बजे सुनील कुमार सेक्टर-3 पुलिस टीओपी और फिर धुर्वा थाना पहुंचे। परिजनों का आरोप है कि आवेदन लेने के बावजूद उसी दिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। रातभर करीब 50 रिश्तेदारों और मोहल्ले के लोगों ने शालीमार बाजार, हटिया रेलवे स्टेशन, धुर्वा बस स्टैंड और आसपास के क्षेत्रों में बच्चों की खोजबीन की।
अगले दिन तीन जनवरी की सुबह धुर्वा थाना प्रभारी पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की गई। सुनील कुमार का कहना है कि अगर पुलिस पहले ही दिन सक्रिय होती, तो शायद आज उनके बच्चे सुरक्षित घर लौट आते। फिलहाल पुलिस सभी संभावित एंगल से जांच कर रही है और अंतरराज्यीय स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है।
इधर, घर के पास उसी स्थान पर जहां कभी अंश और अंशिका खेला करते थे, माता-पिता सुनील कुमार और नीतू अब भी टकटकी लगाए अपने बच्चों की राह देख रहे हैं। उनकी आंखों में बस एक ही उम्मीद है कि उनके मासूम जल्द सुरक्षित लौट आएं।

