पेसा नियमावली मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने सरकार को दी मोहलत, अगली सुनवाई 13 जनवरी 2026 को

Ravikant Upadhyay

रांची। पेसा (पंचायत उपबंध अनुसूचित क्षेत्र) नियमावली से जुड़े महत्वपूर्ण मामले में सोमवार को झारखंड उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष इस मामले पर विचार किया गया। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत से थोड़ी मोहलत की मांग की गई, जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर लिया।

राज्य सरकार की ओर से अदालत को अवगत कराया गया कि संबंधित विभाग द्वारा पेसा नियमावली से संबंधित प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है और इसे कैबिनेट के समक्ष स्वीकृति के लिए भेज दिया गया है। सरकार ने इसी आधार पर मामले में अतिरिक्त समय की मांग की। सरकार का कहना था कि प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही संभव है, इसलिए कुछ और समय दिया जाए। अदालत ने राज्य सरकार की दलीलों को स्वीकार करते हुए मामले में कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया। न्यायालय ने सरकार को आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के लिए समय देते हुए अगली सुनवाई की तिथि 13 जनवरी 2026 निर्धारित कर दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई में राज्य सरकार को इस संबंध में हुई प्रगति और वर्तमान स्थिति की पूरी जानकारी अदालत के समक्ष रखनी होगी।

सुनवाई के दौरान संबंधित विभाग के सचिव मनोज कुमार स्वयं (सशरीर) न्यायालय में उपस्थित रहे। उनकी उपस्थिति को अदालत ने संज्ञान में लिया और मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार से अपेक्षा जताई कि निर्धारित समयसीमा के भीतर आवश्यक निर्णय लिया जाए। गौरतलब है कि पेसा नियमावली को लेकर लंबे समय से राज्य में चर्चा और मांग चल रही है। अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा को अधिक अधिकार देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा पेसा कानून लागू किया गया था, लेकिन झारखंड में इसकी नियमावली अब तक पूरी तरह प्रभावी नहीं हो पाई है। इसे लेकर आदिवासी संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा लगातार आवाज उठाई जा रही है।

इस मामले को और महत्वपूर्ण बनाता है यह तथ्य कि आज ही राज्य मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) की बैठक भी प्रस्तावित है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि पेसा नियमावली से जुड़े प्रस्ताव पर आज की कैबिनेट बैठक में मुहर लग सकती है। यदि ऐसा होता है तो यह राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों और ग्राम सभाओं के अधिकारों के लिहाज से एक बड़ा कदम माना जाएगा। हालांकि, जब तक कैबिनेट की औपचारिक स्वीकृति नहीं मिल जाती, तब तक अदालत की ओर से इस मामले में कोई अंतिम आदेश नहीं दिया जाएगा। अब सभी की निगाहें सरकार के अगले कदम और 13 जनवरी 2026 को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हुई हैं, जहां यह स्पष्ट हो सकेगा कि पेसा नियमावली को लेकर राज्य सरकार ने कितनी प्रगति की है।

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