वाराणसी: समाज में प्रचलित कहावत “पूत कपूत तो का धन संचय” आज के दौर में सच होती दिख रही है। बदलते समय के साथ रिश्तों में आई दूरियां कई बार माता-पिता को अकेलेपन और उपेक्षा की ओर धकेल रही हैं। इसका एक मार्मिक उदाहरण वाराणसी से सामने आया है, जिसने लोगों को झकझोर कर रख दिया है।
वाराणसी के प्रसिद्ध आध्यात्मिक साहित्यकार और पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित श्रीनाथ खंडेलवाल का निधन वृद्धाश्रम में हो गया। लगभग 80 करोड़ रुपये की संपत्ति के मालिक होने के बावजूद उन्हें अपने ही बच्चों की उपेक्षा का सामना करना पड़ा और जीवन के अंतिम दिन उन्होंने वृद्धाश्रम में गुजारे। दुखद बात यह रही कि उनके अंतिम संस्कार में भी उनका कोई बेटा या बेटी शामिल नहीं हुआ।
2023 में मिला था पद्मश्री
काशी निवासी श्रीनाथ खंडेलवाल ने अपने जीवनकाल में सौ से अधिक आध्यात्मिक और साहित्यिक पुस्तकों की रचना की थी। उनके योगदान को देखते हुए उन्हें वर्ष 2023 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। उनके परिवार में दो बेटे और एक बेटी हैं। बताया जाता है कि एक बेटा व्यवसायी है जबकि बेटी सुप्रीम कोर्ट में वकील है।
संपत्ति विवाद और उपेक्षा
सूत्रों के अनुसार, श्रीनाथ खंडेलवाल के पास अकूत संपत्ति थी, लेकिन वे अपना अधिकांश समय लेखन और अध्यात्म में व्यतीत करते थे। इसका फायदा उठाकर उनके बच्चों ने उनकी संपत्ति पर कब्जा कर लिया और उन्हें बीमार अवस्था में असहाय छोड़ दिया। बाद में कुछ समाजसेवियों ने उन्हें काशी कुष्ठ वृद्धाश्रम में भर्ती कराया, जहां उनकी देखभाल नि:शुल्क की जाती रही।वृद्धाश्रम में रहते हुए भी उनके किसी भी परिजन ने उनसे मिलने या हालचाल लेने की जहमत नहीं उठाई।
चंदा जुटाकर हुआ अंतिम संस्कार
स्वास्थ्य बिगड़ने पर उन्हें आईसीयू में भर्ती कराया गया, जहां उनका निधन हो गया। जब उनके बच्चों को यह सूचना दी गई तो उन्होंने व्यस्तता का बहाना बनाते हुए अंतिम दर्शन तक करने से इनकार कर दिया।आखिरकार समाजसेवी अमन और स्थानीय लोगों ने चंदा जुटाकर पूरे विधि-विधान से उनका अंतिम संस्कार किया।

