RTE 2009: कमजोर बच्चों के लिए निजी स्कूलों में आरक्षित सीटों का नामांकन पारदर्शीता

Shashi Bhushan Kumar

शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE), 2009 के तहत कमजोर और अभिवंचित वर्ग के बच्चों के लिए मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों की प्रारंभिक कक्षाओं में 25% आरक्षित सीटों पर नामांकन की प्रक्रिया जिले में पारदर्शी ढंग से संचालित की जा रही है। यह प्रक्रिया ऑनलाइन पोर्टल rteranchi.in के माध्यम से पूरी की जा रही है।

शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए आवेदन प्रक्रिया 16 फरवरी से 22 मार्च 2026 तक चली। इस दौरान जिला प्रशासन को कुल 1499 आवेदन प्राप्त हुए, जिसमें इन आवेदकों ने 3908 सीटों को प्राथमिकता (विकल्प) के रूप में चुना।

आवेदन प्रक्रिया समाप्त होने के बाद उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी रांची, मंजूनाथ भजन्त्री ने समाहरणालय ब्लॉक-ए में सभी संबंधित पदाधिकारियों के साथ ऑनलाइन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग बैठक की। बैठक में जिला जन संपर्क पदाधिकारी, जिला शिक्षा अधीक्षक, सहायक निदेशक सामाजिक सुरक्षा, सिविल सर्जन, RIMS प्रतिनिधि सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक में यह निर्णय लिया गया कि सभी आवेदकों द्वारा अपलोड किए गए प्रमाण-पत्रों (आय प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र आदि) की जांच 26 मार्च 2026 तक पूरी की जाएगी। जांच संबंधित अनुमंडल पदाधिकारी, अंचल अधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी, रांची नगर निगम के अधिकारी और अन्य संबंधित पदाधिकारियों द्वारा ऑनलाइन की जाएगी।

प्रमाण-पत्रों की जांच पूर्ण होने के पश्चात ऑनलाइन लॉटरी (कंप्यूटरीकृत रैंडम चयन) की तिथि उपायुक्त द्वारा शीघ्र निर्धारित की जाएगी।

उपायुक्त भजन्त्री ने कहा कि जिला प्रशासन कमजोर एवं अभिवंचित वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस प्रक्रिया से RTE अधिनियम की भावना के अनुरूप हर बच्चे को समान अवसर प्रदान किया जाएगा।

अभिभावक अपने आवेदन की स्थिति नियमित रूप से rteranchi.in पोर्टल पर देख सकते हैं। किसी भी सहायता या शिकायत के लिए पोर्टल पर उपलब्ध संपर्क नंबरों का उपयोग किया जा सकता है।

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शशी भूषण कुमार | पत्रकार (Journalist)- शशी भूषण कुमार 12+ वर्षों के अनुभव वाले पत्रकार हैं। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में कार्य करते हुए वर्तमान में Live 7 TV.com में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में संपादकीय नेतृत्व और न्यूज़ प्लानिंग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वे पिछले तीन वर्षों से झारखंड स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी में पत्रकारिता विभाग के गेस्ट फैकल्टी भी हैं। ग्रामीण पत्रकारिता पर शोध कार्य से जुड़े रहते हुए वे जमीनी और आदिवासी क्षेत्रों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
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