मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी का आरोप, आदिवासी नेत्री निशा भगत की बढ़ीं मुश्किलें

Ravikant Upadhyay

रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ कथित तौर पर अमर्यादित और आपत्तिजनक भाषा के प्रयोग को लेकर आदिवासी नेत्री निशा भगत की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। इस मामले में गुरुवार को रांची के अरगोड़ा थाना परिसर में उस वक्त हलचल तेज हो गई, जब दर्जनों महिलाएं एकजुट होकर थाने पहुंचीं और निशा भगत के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई।

शिकायत करने पहुंची महिलाओं का आरोप है कि निशा भगत ने हाल के दिनों में सार्वजनिक मंच और सोशल मीडिया के माध्यम से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक और अशोभनीय शब्दों का प्रयोग किया। महिलाओं का कहना है कि इस तरह की भाषा न केवल मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति की गरिमा को ठेस पहुंचाती है, बल्कि समाज में महिलाओं और आदिवासी समाज की छवि को भी नुकसान पहुंचाती है।

महिलाओं ने अपनी शिकायत में कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन राज्य के निर्वाचित नेता हैं और उनके खिलाफ इस प्रकार की भाषा का इस्तेमाल लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि निशा भगत के बयान समाज में वैमनस्य फैलाने वाले हैं और इससे सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंच सकता है। शिकायतकर्ताओं ने पुलिस से मांग की है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए निशा भगत के खिलाफ सख्त धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की जाए और उनके बयानों पर कानूनी कार्रवाई की जाए।

अरगोड़ा थाना पहुंचे महिलाओं के समूह में शामिल कई महिलाओं ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वे किसी राजनीतिक दल के इशारे पर नहीं, बल्कि स्वेच्छा से मुख्यमंत्री के सम्मान और सामाजिक मर्यादा की रक्षा के लिए थाने पहुंची हैं। उनका कहना था कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर किसी भी व्यक्ति को गाली-गलौज या आपत्तिजनक टिप्पणी करने की छूट नहीं दी जा सकती।

वहीं, पुलिस अधिकारियों ने बताया कि महिलाओं की ओर से लिखित शिकायत प्राप्त कर ली गई है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है और उपलब्ध तथ्यों व साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। पुलिस का कहना है कि मामला संवेदनशील है, इसलिए सभी पहलुओं की गंभीरता से पड़ताल की जा रही है।

इस प्रकरण के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। कुछ संगठनों ने निशा भगत के बयानों की निंदा करते हुए कहा है कि लोकतंत्र में आलोचना का अधिकार जरूर है, लेकिन उसकी भी एक मर्यादा होती है। वहीं दूसरी ओर, कुछ लोग इसे राजनीतिक विवाद से जोड़कर भी देख रहे हैं।

फिलहाल, इस पूरे मामले पर सबकी निगाहें पुलिस की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो आदिवासी नेत्री निशा भगत के खिलाफ कानूनी शिकंजा कस सकता है। आने वाले दिनों में यह मामला झारखंड की राजनीति और सामाजिक विमर्श में और भी तूल पकड़ सकता है।

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